- कांग्रेस के दो अंतरे गाने के रुख पर भाजपा का हमला; प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सवाल को जनता के बीच ले जाने की तैयारी
भारत 19
नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम’ अब सिर्फ राष्ट्रीय गीत की बहस नहीं रहेगा। भाजपा ने साफ संकेत दे दिया है कि वह इसे कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रवाद की राजनीतिक लड़ाई में बदलने जा रही है। पार्टी ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के उस रुख पर हमला बोला है, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरे गाने की परंपरा को जारी रखने की बात कही गई है। अब भाजपा इसे लेकर देशव्यापी अभियान चलाएगी। भाजपा की रणनीति साफ है, राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी भूमिका को केंद्र में रखकर कांग्रेस से उसके फैसलों पर जवाब मांगा जाए। पार्टी इसे केवल गीत के दो अंतरों का विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कांग्रेस के दृष्टिकोण का सवाल बना रही है।
कांग्रेस का पुराना फैसला, भाजपा का नया हमला
कांग्रेस का दो अंतरे गाने का रुख नया नहीं है। इसकी जड़ 1937 के उस फैसले में है, जब ‘वंदे मातरम’ के दो अंतरे ही गाने का निर्णय किया था। लोकसभा के बीते मानसून सत्र में राष्ट्रीय गीत पूरा गाने का कानून बन गया उसके बाद भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने फैसला किया कि वह 1937 में लिए गए फैसले पर ही कायम रहेगी। भाजपा अब इसी फैसले को कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हथियार बना रही है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत के साथ समझौता किया और उसके पूरे स्वरूप को लेकर लगातार असहजता दिखाई। भाजपा का अभियान कांग्रेस की सफाई को चुनौती देगा। कांग्रेस इसे ऐतिहासिक संदर्भ और लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था बताएगी, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रीय सम्मान के सवाल पर कांग्रेस की राजनीति से जोड़कर जनता के बीच ले जाएगी।
प्रस्ताव के बाद अब देशभर में उतरेगी भाजपा
राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के साथ ही भाजपा ने साफ कर दिया है कि मामला केवल दिल्ली की राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी देशभर में ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और राष्ट्रीय महत्व को अभियान के जरिए सामने रखेगी। यह अभियान भाजपा को कांग्रेस के खिलाफ एक ऐसा मुद्दा देगा, जिसमें वह सीधे-सीधे राष्ट्रवाद की बहस खड़ी कर सके। पार्टी का प्रयास कांग्रेस को इस सवाल पर रक्षात्मक स्थिति में लाने का होगा कि आखिर राष्ट्रीय गीत के केवल दो अंतरे गाने की जरूरत क्यों पड़ी और उस ऐतिहासिक फैसले का आधार क्या था।
1937 का संदर्भ, 2026 की सियासत
‘वंदे मातरम’ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया और स्वतंत्रता आंदोलन में ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संघर्ष का बड़ा प्रतीक बना। बाद में इसके कुछ हिस्सों को लेकर धार्मिक आपत्तियां सामने आईं। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने 1937 में पहले दो अंतरों को सार्वजनिक उपयोग तक सीमित रखने का फैसला किया। अब भाजपा इसी इतिहास को नए राजनीतिक संदर्भ में रख रही है। उसका निशाना सिर्फ कांग्रेस का मौजूदा निर्णय नहीं, बल्कि उस पूरी राजनीतिक सोच पर है, जिसे वह राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कांग्रेस का दोहरा रवैया बताती है।
राष्ट्रवाद के मोर्चे पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी
भाजपा के लिए ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उसे कांग्रेस के खिलाफ वैचारिक हमला तेज करने का अवसर देता है। पार्टी आर्थिक या प्रशासनिक मुद्दे से अलग एक बार फिर पहचान, इतिहास और राष्ट्रवाद की जमीन पर राजनीतिक मुकाबला खड़ा करना चाहती है। देशव्यापी अभियान का ऐलान बताता है कि भाजपा इस विवाद को एक-दो बयान तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम’ की बहस के जरिए कांग्रेस के अतीत, उसके फैसलों और राष्ट्रवाद पर उसके राजनीतिक रुख को लगातार निशाना बनाया जा सकता है।


