- आजमगढ़ में अखिलेश यादव पर निशाना, 2027 चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे के जरिए यूपी की सियासत में नई चुनौती देने के संकेत, मुस्लिम समाज से खुद का नेतृत्व खड़ा करने की अपील
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ आजमगढ़ से मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व का मुद्दा उठाकर सियासी बहस तेज कर दी है। AIMIM प्रमुख ने कहा कि मुस्लिम समाज को नेहरू-गांधी जैसे नेताओं की पार्टियों के पीछे चलने के बजाय अपने नेता तैयार करने चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव और कांग्रेस पर मुस्लिमों का समर्थन लेने, लेकिन सत्ता और नेतृत्व में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाया। साथ ही, यूपी में तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी के संकेत देकर ओवैसी ने साफ किया कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में सपा-कांग्रेस के राजनीतिक वर्चस्व को भी चुनौती देगी।
‘आप समर्थन करो’ नहीं, ‘आप नेता बनो’
11 अक्टूबर को आजमगढ़ के कोटिला के पास सिरसल क्लब ग्राउंड में आयोजित जनसभा में ओवैसी ने मुस्लिम समाज से पारंपरिक राजनीतिक निर्भरता से बाहर निकलने की अपील की। उन्होंने कहा, “अब हमें गांधी या नेहरू की जरूरत नहीं है, हमें अपने नेताओं की जरूरत है।” ओवैसी ने अपने भाषण में यह संदेश दिया कि मुस्लिम मतदाताओं को केवल दूसरी पार्टियों के पक्ष में मतदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने राजनीतिक नेतृत्व और स्वतंत्र पहचान को मजबूत करना चाहिए। ओवैसी ने जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और मौलाना अबुल कलाम आजाद का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यधारा के दल मुस्लिम समाज का समर्थन तो चाहते हैं, लेकिन स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व को आगे बढ़ाने में पीछे रहते हैं।
अखिलेश यादव पर मुस्लिम हिस्सेदारी को लेकर हमला
AIMIM प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर चुनाव के समय मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन मांगने, लेकिन सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में अपेक्षित भागीदारी नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीति और सपा के टिकट वितरण पर भी सवाल उठाए। ओवैसी का दावा है कि मुस्लिम समाज को केवल किसी पार्टी का समर्थक बने रहने के बजाय अपनी राजनीतिक ताकत विकसित करनी चाहिए। आजमगढ़ में इस मुद्दे को उठाने का राजनीतिक महत्व भी है। जिले में समाजवादी पार्टी का मजबूत आधार रहा है और मुस्लिम-यादव समीकरण उसकी चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। ओवैसी की अपील इसी पारंपरिक समीकरण के बीच AIMIM के लिए स्वतंत्र राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश के रूप में सामने आई है।
2027 के चुनाव में तीसरे मोर्चे की तैयारी
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले दलों के साथ गठबंधन की कोशिश करती रही, लेकिन उसे उचित जगह नहीं मिली। इसी पृष्ठभूमि में AIMIM उत्तर प्रदेश में तीसरे मोर्चे का विकल्प तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी छोटे दलों के साथ संभावित गठबंधन को लेकर संपर्क साध रही है। यदि तीसरा मोर्चा आकार लेता है, तो विधानसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच सीटों तथा मतदाताओं के समर्थन को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि, गठबंधन की अंतिम तस्वीर और उसका चुनावी असर सहयोगी दलों, उम्मीदवारों और क्षेत्रवार राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
योगी और अखिलेश को संभल से चुनाव लड़ने की चुनौती
आजमगढ़ की सभा में ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दोनों नेताओं को संभल से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। इसके साथ ही भाजपा सरकार की नीतियों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। ओवैसी ने घरों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने आजमगढ़ के विकास, एयरपोर्ट और शिक्षा से जुड़े सवाल भी उठाए। इस तरह उनके भाषण में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ स्थानीय विकास और सरकारी नीतियों को भी जगह मिली।
80 बनाम 20 के मुकाबले 99 बनाम 1 का नारा
ओवैसी ने आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में लड़ाई 80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत के बजाय 99 प्रतिशत बनाम एक प्रतिशत की होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों के आर्थिक सवालों के बजाय धार्मिक आधार पर विभाजन की राजनीति कर रही है। ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि गरीबी के मामले में आजमगढ़ प्रदेश के जिलों में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस में धार्मिक विभाजन के बजाय गरीबी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह आंकड़ा और उसकी व्याख्या ओवैसी ने अपने भाषण में प्रस्तुत की।
सपा के मजबूत क्षेत्र में AIMIM का सियासी दांव
आजमगढ़ में ओवैसी की सभा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM के बढ़ते राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। पार्टी पूर्वांचल समेत उन क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ओवैसी ने अपने संबोधन के जरिए भाजपा सरकार की आलोचना के साथ-साथ सपा-कांग्रेस के नेतृत्व और मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी के दावों को भी चुनौती दी है। तीसरे मोर्चे की तैयारी और स्वतंत्र नेतृत्व की अपील से यह स्पष्ट है कि AIMIM 2027 के चुनाव में अपनी अलग राजनीतिक पहचान के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।


