CJP के प्रदर्शन से पहले मेट्रो प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई; केंद्र, दिल्ली पुलिस और DMRC के अधिकारियों से मांगा जवाब, अनावश्यक बैरिकेडिंग हटाने और मेट्रो सेवाएं सामान्य रखने के निर्देश
भारत 19/ नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में लगाई गई बैरिकेडिंग, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 11 अक्टूबर को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9 अक्टूबर को सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बाधित नहीं करने के अदालत के निर्देश के बावजूद मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गईं और ट्रेनों को रद्द करने की योजना बनाई गई।
केंद्र, दिल्ली पुलिस और DMRC से जवाब तलब
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) की अध्यक्ष डी. थारा को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों से आम लोगों को परेशानी हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। केंद्र सरकार को मंगलवार तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया। इस मामले में नोटिस और जवाब तलब किए जाने को केवल दिल्ली सरकार के खिलाफ कार्रवाई बताना सही नहीं होगा; उपलब्ध रिपोर्टों में केंद्र के गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और DMRC अध्यक्ष का उल्लेख है।
‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते’
9 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद करने और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई की थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’ अदालत का जोर इस बात पर था कि सुरक्षा उपाय संभावित खतरे के अनुपात में हों और उनके कारण आम लोगों की आवाजाही तथा जरूरी सेवाएं अनावश्यक रूप से बाधित न हों।
अनावश्यक बैरिकेडिंग हटाने और मेट्रो सामान्य रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां बैरिकेडिंग की स्पष्ट आवश्यकता नहीं है, वहां से उसे हटाया जाए और यातायात को सुचारु रखा जाए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया, ताकि न्यायालयों तक पहुंचने में बाधा न आए। अदालत ने मेट्रो सेवाओं को सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चलाने और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह रोकने के बजाय नियंत्रित तरीके से संचालित करने का निर्देश दिया। यात्रियों को प्रतिबंधों और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देने के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करने पर भी जोर दिया गया। हालांकि, बैरिकेडिंग हटाने के निर्देश का अर्थ पूरी दिल्ली से सभी बैरिकेड्स हटाने का सार्वभौमिक आदेश नहीं है। सुरक्षा की वास्तविक जरूरत के अनुसार प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन वे आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए।
CJP के प्रदर्शन से पहले बढ़ाई गई थी सुरक्षा
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी मांगें उठाना चाहती थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई। मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास पर पाबंदियों और रेल सेवाओं को लेकर भी सवाल उठे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं। सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई को लेकर अदालत में याचिकाएं दाखिल की गईं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।


