- आकाश आनंद और दीपिका को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं देने का ऐलान; 12 सितंबर के फैसले में बदलाव, मायावती बोलीं- आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान को आगे किया जाएगा
BHARAT 19| लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती ने यह फैसला 20 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महज आठ दिन पहले मायावती ने अलग रुख अपनाया था। 12 सितंबर को उन्होंने कहा था कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार की बेटी दीपिका को जिम्मेदारी दी जा सकती है। उस समय दीपिका को संगठन में संभावित भूमिका के रूप में सामने रखा गया था।
आकाश के बाद अब दीपिका भी जिम्मेदारी से बाहर
मायावती के ताजा बयान के मुताबिक अब आकाश आनंद के साथ उनकी बहन दीपिका को भी पार्टी की किसी जिम्मेदारी से दूर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले में अब बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। मायावती ने यह भी कहा कि ईशान के मामले में अभी तक ऐसा लगता है कि वह आकाश की तरह पार्टी हित के विपरीत स्थिति में नहीं जाएंगे, लेकिन भविष्य के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
ईशान को पहले मिल चुकी है बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी
ईशान आनंद को इससे पहले सितंबर की शुरुआत में बसपा में बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया गया था और उत्तर भारत के दो सेक्टरों के तहत आने वाले राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्हें अपने कार्यक्षेत्र की समीक्षा कर रिपोर्ट मायावती और अपने पिता आनंद कुमार को देने की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद 12 सितंबर को मायावती ने ईशान समेत दोनों बेटों को भविष्य में राजनीतिक पद नहीं देने की बात कही थी। अब 20 सितंबर के ताजा बयान में उन्होंने ईशान को परिवार से पार्टी में आगे बढ़ाए जाने वाला एकमात्र सदस्य बताया है।
परिवारवाद पर मायावती ने फिर रखी अपनी बात
मायावती ने अपने फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम की विचारधारा और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से जोड़ते हुए परिवार के प्रति मोह से ऊपर उठकर पार्टी और आंदोलन के हित में काम करने की बात कही है। उनका कहना है कि किसी रिश्तेदार को आगे बढ़ाने के बजाय पार्टी के प्रति ईमानदारी और निष्ठा को महत्व दिया जाना चाहिए। 12 सितंबर के अपने बयान में भी मायावती ने कहा था कि वह परिवारवाद के खिलाफ कांशीराम के रुख से सहमत हैं और पार्टी को परिवारवाद से दूर रखना चाहती हैं।
23 सितंबर को बसपा की अहम बैठक
मायावती ने 23 सितंबर को बसपा की बेहद जरूरी ऑल इंडिया बैठक बुलाए जाने की भी जानकारी दी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पार्टी में परिवार की भूमिका और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर पिछले कुछ सप्ताह में कई फैसले बदले हैं। सितंबर की शुरुआत से ही बसपा में आकाश आनंद, ईशान आनंद और दीपिका आनंद को लेकर लगातार बदलाव सामने आए हैं। ऐसे में 23 सितंबर की बैठक में संगठन से जुड़े आगे के फैसलों पर भी नजर रहेगी।


