- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले छह संगठनात्मक क्षेत्रों में जिला प्रभारियों की नई सूची जारी; प्रदेश व पूर्व पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी, कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलों में भी बदले प्रभारी
लखनऊ। योगी का कटेंगे तो बंटेंगे और मोदी का एक रहेंगे तो नेक रहेंगे संदेश के विपरीत चाहे संगठन में दायित्वों का निर्धारण हो या फिर चुनावों में टिकट बंटवारा भाजपा भी जातीय समीकरण साध कर ही फैसले करती हालांकि विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले जिला प्रभारियों की नियुक्ति में प्रदेश संगठन के मुखिया ने जातीय समीकरण पीछे छोड़ सभी 98 सांगठनिक जिलों और महानगरों के लिए नए जिला प्रभारियों की नियुक्त में अनुभव और पार्टी के प्रति निष्ठा को ज्यादा तरजीह दी। सूची में प्रदेश पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। सूची में संगठन के विभिन्न स्तरों पर पहले भी जिम्मेदारी संभाल चुके कई नेताओं को दोबारा जिलों की कमान दी गई है।
पुराने संगठनात्मक चेहरों की फिर हुई वापसी
नई सूची में ऐसे कई नाम हैं, जो पहले प्रदेश, क्षेत्र या जिला संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदेश पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों को जिला प्रभारी बनाया गया है। उदाहरण के तौर पर गाजियाबाद महानगर की जिम्मेदारी अशोक कटारिया, वाराणसी महानगर और जिले की अरुण पाठक तथा लखनऊ महानगर की जिम्मेदारी त्रयम्बक त्रिपाठी को दी गई है। रायबरेली में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह को जिम्मेदारी दिए जाने से सूची का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। वहीं कई अन्य जिलों में भी वरिष्ठ संगठनात्मक चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे संकेत मिलता है कि चुनाव से पहले जिला संगठन की कमान ऐसे नेताओं को देने पर जोर रहा है, जिन्हें पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली का पहले से अनुभव है।
जातीय समीकरण की चर्चा के बीच अनुभव का पैटर्न
भाजपा की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व लगातार चर्चा का विषय रहा है। संगठन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर भी समय-समय पर रिपोर्टें सामने आती रही हैं। ऐसे में नई जिला प्रभारी सूची को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी ने इन नियुक्तियों को जातीय प्रतिनिधित्व के आधार पर घोषित नहीं किया है। उपलब्ध सूची में नियुक्तियों का आधिकारिक आधार नेताओं की जाति नहीं, बल्कि उन्हें दी गई संगठनात्मक जिम्मेदारी है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि **98 जिला प्रभारियों की सूची में जातीय समीकरण की तुलना में संगठनात्मक पृष्ठभूमि अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। यानी चुनाव से ठीक पहले जिला स्तर पर संगठन की कमान बांटते समय पार्टी ने बड़ी संख्या में ऐसे नेताओं को जगह दी है, जिनका पहले से संगठन में काम करने का अनुभव रहा है।
कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलों में भी बदलाव
प्रदेशव्यापी फेरबदल का कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बड़ा असर दिखा है। इस क्षेत्र के 17 सांगठनिक जिलों और महानगरों में नए जिला प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इनमें कानपुर महानगर उत्तर, दक्षिण और कानपुर ग्रामीण भी शामिल हैं। कानपुर महानगर उत्तर की जिम्मेदारी अनिल यादव, दक्षिण की प्रांशुदत्त द्विवेदी और कानपुर ग्रामीण की आनंद सिंह को दी गई है। कानपुर देहात में शिवमहेश दुबे, इटावा में देवेश कोरी, कन्नौज में रूपेश गुप्ता, फर्रुखाबाद में नरेंद्र राजपूत, फतेहपुर में राहुल अग्निहोत्री और औरैया में दिनेश वाजपेयी को जिम्मेदारी मिली है। बुंदेलखंड में झांसी महानगर की जिम्मेदारी रंजना उपाध्याय, झांसी जिले की मानवेन्द्र सिंह, बांदा की संत विलास शिवहरे, महोबा की इंद्रपाल पटेल, चित्रकूट की संजीव श्रृंगीऋषि, हमीरपुर की प्रदीप सरावगी, जालौन की भुवन प्रकाश गुप्ता और ललितपुर की अशोक राजपूत को सौंपी गई है।
बूथ से प्रदेश तक फीडबैक की कड़ी
जिला प्रभारी प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय संगठन के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। नई व्यवस्था में उनकी भूमिका जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और पार्टी कार्यक्रमों के संचालन के साथ स्थानीय फीडबैक प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने की रहेगी। 2027 के चुनाव से पहले बूथ समितियों की सक्रियता, मंडल और शक्ति केंद्र स्तर की गतिविधियां तथा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय उनके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में रहेंगे।
छह क्षेत्रों में बांटी गई संगठन की जिम्मेदारी
98 जिला और महानगर इकाइयों की जिम्मेदारी छह संगठनात्मक क्षेत्रों पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर में बांटी गई है। सूची में महानगरों और जिलों के लिए अलग-अलग प्रभारियों के नाम तय किए गए हैं। कानपुर क्षेत्र के अलावा अवध में लखनऊ महानगर की जिम्मेदारी त्रयम्बक त्रिपाठी और लखनऊ जिले की सौरभ मिश्रा को मिली है। काशी क्षेत्र में वाराणसी महानगर और जिले की जिम्मेदारी अरुण पाठक को दी गई है। पश्चिम में गाजियाबाद महानगर की कमान अशोक कटारिया और नोएडा महानगर की डीके शर्मा को सौंपी गई है।
2027 से पहले संगठन की नई परीक्षा
98 जिला प्रभारियों की नियुक्ति को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक पुनर्संयोजन के रूप में देखा जा रहा है। अब इन प्रभारियों के जिलों में प्रवास और बैठकों के जरिए यह सामने आएगा कि नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर संगठन के कामकाज और प्रदेश नेतृत्व के फीडबैक तंत्र को कितना सक्रिय करती है। कुल मिलाकर, प्रदेशव्यापी सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की राजनीति की पृष्ठभूमि जरूर मौजूद है, लेकिन जिला प्रभारियों के इस फेरबदल में पुराने संगठनात्मक चेहरों की वापसी और अनुभव रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारी देना सबसे स्पष्ट पैटर्न के रूप में सामने आता है।


