- 2022 की वसीयत में पत्नी, बेटे और बेटी को संपत्ति में हिस्सा, बहू का नाम नहीं; हत्या से दो दिन पहले कथित शूटर ने नया सिम लेकर सुब्रत को छह बार कॉल की
भारत 19
कानपुर। फार्मास्युटिकल कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच में संपत्ति और कॉल रिकॉर्ड की दो अहम कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस को वर्ष 2022 की पंजीकृत वसीयत मिली है, जिसमें पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी को संपत्ति में हिस्सेदार बनाया गया था। बहू शालू का नाम वसीयत में नहीं है। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि संपत्ति के बंटवारे का हत्या की कथित साजिश से कोई संबंध था या नहीं।
हत्या से दो दिन पहले खरीदा नया सिम
जांच में सामने आया है कि कथित शूटर विशाल गौतम ने तीन सितंबर को नया सिम खरीदा था, यानी हत्या से दो दिन पहले। इसी नंबर से उसने सुब्रत को छह बार कॉल की। पुलिस इस संपर्क की वजह और बातचीत के संदर्भ की पड़ताल कर रही है। इसी नंबर से शालू से भी संपर्क किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े सात मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड जुटाई है। मई से सितंबर के शुरुआती दिनों तक के इन रिकॉर्ड की करीब 1000 पन्नों में जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, एक मई से पांच सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल के बीच करीब 309 बार संपर्क हुआ।
सुब्रत की भूमिका भी जांच के दायरे में
नए कॉल रिकॉर्ड सामने आने के बाद पुलिस ने कारोबारी के बेटे सुब्रत की भूमिका की भी जांच शुरू की है। पुलिस का फोकस इस बात पर है कि हत्या से पहले विशाल से लगातार संपर्क का क्या संदर्भ था और हत्या से दो दिन पहले नए नंबर से हुई छह कॉल का उद्देश्य क्या था। हालांकि, सिर्फ कॉल रिकॉर्ड या किसी व्यक्ति से लगातार बातचीत अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करती। पुलिस के अनुसार, विशाल ने पूछताछ में दावा किया है कि उसने शालू के कहने पर हत्या की। शालू ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस दोनों के बयानों को कॉल रिकॉर्ड, CCTV और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों से मिलाकर जांच रही है।
संपत्ति से डिजिटल रिकॉर्ड तक जांच का दायरा
मनोचा की संपत्तियों और आर्थिक मामलों की भी जांच चल रही है। पुलिस को कानपुर और गाजियाबाद में उनकी संपत्तियों की जानकारी मिली है। 2022 की वसीयत में पत्नी, बेटे और बेटी को हिस्सेदारी दिए जाने का तथ्य सामने आने के बाद संपत्ति के बंटवारे को भी जांच की एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।


