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महंगे सोने ने बदला ज्वेलरी बाजार, विदेशी डिजाइन पर जोर

  • गणेशोत्सव और सहालग से पहले 9, 14 और 18 कैरेट के हल्के जेवरों का स्टॉक बढ़ा; जापान, इटली, जर्मनी, थाईलैंड, हांगकांग और यूएई से प्रेरित डिजाइन कम वजन में देंगे बड़ा और प्रीमियम लुक

भारत 19

नई दिल्ली। सोने की कीमतों में तेजी ने इस बार ज्वेलरी बाजार की रणनीति बदल दी है। गणेशोत्सव से शुरू हो रहे त्योहारी दौर और उसके बाद आने वाली सहालग को देखते हुए सराफा कारोबारियों का जोर अब हल्के वजन, कम कैरेट और विदेशी डिजाइन वाली ज्वेलरी पर है। मकसद साफ है, कि सोने की ऊंची कीमत के बीच ग्राहक कम वजन में भी आकर्षक और अपेक्षाकृत भारी लुक वाले आभूषण खरीद सके।

10 सितंबर को सोने का भाव 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,45,000 रुपये प्रति किलो रहा। महंगे भाव का असर ग्राहकों की खरीद क्षमता पर पड़ने की आशंका को देखते हुए कारोबारियों ने भारी ज्वेलरी में पूंजी लगाने के बजाय हल्की ज्वेलरी का स्टॉक बढ़ाने की तैयारी की है। भारतीय बाजार में पारंपरिक 22 कैरेट ज्वेलरी के साथ अब 9, 14 और 18 कैरेट के आभूषणों की रेंज भी ज्यादा दिखाई देगी। जापान, इटली, जर्मनी, थाईलैंड, हांगकांग और यूएई से प्रेरित डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। कुछ डिजाइन सीधे विदेशों से मंगाए जाएंगे, जबकि बड़ी संख्या में विदेशी शैली से प्रेरित आभूषण भारतीय निर्माता और कारीगर स्थानीय स्तर पर तैयार करेंगे।

कम कैरेट में बड़ा लुक, 9 कैरेट पर खास जोर

इस बार कारोबारियों का खास जोर 9 कैरेट ज्वेलरी पर है। पिछले साल कुछ बाजारों में 9 कैरेट के आभूषण पेश किए गए थे, लेकिन शुरुआती डिजाइन ग्राहकों को खास आकर्षित नहीं कर सके। इस बार कम कैरेट में बेहतर डिजाइन, फिनिश और भारी लुक देने पर काम किया जा रहा है। 9 कैरेट ज्वेलरी में 37.5 प्रतिशत सोना होता है। 14 कैरेट में 58.3 प्रतिशत, 18 कैरेट में 75 प्रतिशत और 22 कैरेट में करीब 91.6 प्रतिशत सोना होता है। कम कैरेट की ज्वेलरी का फायदा यह है कि सोने की ऊंची कीमत के बावजूद ग्राहक कम सोने में अपेक्षाकृत बड़ा और आधुनिक डिजाइन खरीद सकता है। जुलाई 2025 में 9 कैरेट को बीआईएस की अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था में शामिल किए जाने के बाद इसकी प्रमाणित शुद्धता के साथ बिक्री संभव हुई है। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल और आयरलैंड जैसे बाजारों में 9 कैरेट सोने के रूप में स्वीकार किया जाने वाला न्यूनतम कैरेट है।

महंगे सोने से बदली ग्राहकों की खरीदारी

पिछले वर्ष सोने की कीमतों में तेजी का असर ज्वेलरी की बिक्री पर साफ दिखाई दिया। धनतेरस के दौरान देश में सोने की बिक्री की मात्रा एक साल पहले की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत कम रही थी, जबकि ज्वेलरी की मांग करीब 30 प्रतिशत तक घटी थी। निवेश करने वाले ग्राहकों ने सिक्कों और बार को ज्यादा प्राथमिकता दी। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2025 में भारत की ज्वेलरी मांग 24 प्रतिशत घटकर 430.5 टन रह गई। कोविड प्रभावित 2020 को छोड़ दें तो यह करीब तीन दशक का सबसे निचला स्तर था। इसके विपरीत निवेश के लिए सोने की मांग 17 प्रतिशत बढ़कर 280.4 टन हो गई। इस बदलाव से कारोबारियों ने सबक लिया है। इस बार भारी ज्वेलरी के बजाय हल्की चेन, अंगूठी, झुमके, पेंडेंट, ब्रेसलेट और छोटे नेकलेस के ऑर्डर बढ़ाए जा रहे हैं। कोशिश है कि कम वजन में डिजाइन और आकार का ऐसा संतुलन मिले, जिससे ग्राहक अपने बजट में खरीदारी कर सके।

विदेशी डिजाइन से बदलेगा ज्वेलरी का ट्रेंड

त्योहारी सीजन में भारतीय ज्वेलरी बाजार का डिजाइन ट्रेंड इस बार ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दिखाई देगा। अगस्त 2026 में हुए आईआईजेएस भारत प्रीमियर में 80 से ज्यादा देशों के लोगों की भागीदारी रही। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बढ़ने के साथ विदेशी डिजाइन और उत्पाद शैली का प्रभाव भी भारतीय बाजार में बढ़ रहा है। इटली से प्रभावित ज्वेलरी में बारीक मशीन फिनिश, आधुनिक ज्यामितीय डिजाइन और हल्के आभूषणों पर जोर है। महंगे सोने के दौर में यह शैली इसलिए उपयोगी है क्योंकि कम वजन में भी आभूषण प्रीमियम दिखाई देता है। यूएई और दुबई की शैली का प्रभाव ज्यादा भव्य डिजाइन में दिखेगा। बड़े नेकलेस, स्टोन-स्टडेड सेट और चमकदार डिजाइन भारतीय त्योहार और शादी की पसंद से मेल खाते हैं। हांगकांग की ज्वेलरी में डायमंड, मोती, रंगीन रत्न और नए मैटीरियल के इस्तेमाल पर जोर रहता है। इससे ग्राहकों को पारंपरिक सोने की ज्वेलरी से अलग विकल्प मिलेंगे।

जापानी सादगी और थाई रंगीन रत्नों का आकर्षण

जापानी डिजाइन में सादगी, साफ ज्यामितीय आकार और सूक्ष्मता प्रमुख हैं। युवा और कामकाजी ग्राहकों के लिए रोजमर्रा में पहने जा सकने वाले हल्के आभूषण इस शैली से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं थाईलैंड रंगीन रत्नों और जेमस्टोन कटिंग के लिए जाना जाता है। ऐसे में सोने के साथ रंगीन पत्थरों के इस्तेमाल वाली ज्वेलरी भी इस बार त्योहारों में अलग आकर्षण पैदा कर सकती है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के 2026 के उत्पाद कैटलॉग में 9, 10, 14, 18, 21 और 22 कैरेट तक की ज्वेलरी बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं के उदाहरण हैं। इससे संकेत मिलता है कि कम कैरेट के आभूषण वैश्विक बाजार में स्थापित हैं और भारतीय बाजार भी इनके डिजाइन व उत्पाद मॉडल से प्रभावित हो रहा है।

गणेशोत्सव से सहालग तक हल्की ज्वेलरी पर जोर

गणेशोत्सव के साथ त्योहारी खरीदारी शुरू हो रही है और इसके बाद सहालग का दौर आएगा। ऐसे में सराफा बाजार ने अलग-अलग बजट वाले ग्राहकों के लिए हल्के और छोटे आभूषणों की रेंज तैयार की है। सोने की ऊंची कीमत ने बाजार को कम वजन और ज्यादा डिजाइन की ओर मोड़ दिया है। 9, 14 और 18 कैरेट के आभूषण, विदेशी डिजाइन और हल्के वजन की ज्वेलरी इसी बदलाव को दिखाती है। कारोबारियों को उम्मीद है कि कम वजन में बड़ा और आकर्षक लुक ग्राहकों को महंगे सोने के बावजूद त्योहार और शादी के लिए खरीदारी के लिए प्रेरित करेगा।

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