- हाजिर सोना 4,643.63 डालर प्रति औंस पहुंचा, एक सप्ताह में पांच प्रतिशत से ज्यादा तेजी; फेड, महंगाई और बांड यील्ड पर टिकी बाजार की अगली नजर
भारत 19 कानपुर। डॉलर की कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को नई मजबूती दी है। सोमवार को हाजिर सोना 0.9 प्रतिशत बढ़कर 4,643.63 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। मई के मध्य के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले सप्ताह पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी के बाद सोमवार की बढ़त ने संकेत दिया कि ऊंचे भाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी बनी हुई है। अमेरिकी सोना वायदा भी 0.4 प्रतिशत बढ़कर 4,699.10 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। मौजूदा तेजी का कारण कमजोर डॉलर के साथ अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि के बांडों की पुनर्खरीद योजना, आर्थिक व मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले महंगाई आंकड़े और फेड के संकेत तेजी को कितना आगे ले जाते हैं।
डॉलर की कमजोरी से बढ़ी खरीदारी की गुंजाइश
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर कमजोर पड़ने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और कीमतों को समर्थन मिलता है। इस बार डॉलर पर दबाव के पीछे अमेरिकी बांड बाजार की हलचल भी अहम है। अमेरिकी ट्रेजरी लंबी अवधि के सरकारी बांडों की पुनर्खरीद बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में बाजार डॉलर और बांड यील्ड की दिशा पर नजर रखे हुए है, क्योंकि दोनों का असर सोने के आकर्षण पर पड़ता है। निवेशक फिलहाल यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी वित्तीय और मौद्रिक नीति में आगे होने वाले बदलाव ब्याज दरों और डॉलर को किस दिशा में ले जाएंगे। सोने की अगली चाल काफी हद तक इसी आकलन से तय होगी।
महंगाई के आंकड़ों ने बढ़ाई ब्याज दर उम्मीदें
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में वृद्धि 3.5 प्रतिशत थी। खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर मूल उपभोक्ता महंगाई जुलाई में 2.5 प्रतिशत रही, जो जून के 2.6 प्रतिशत से कम है। मासिक आधार पर जुलाई में उपभोक्ता कीमतों में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। महंगाई में यह नरमी बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे फेड की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर उम्मीदें बदल सकती हैं। आने वाले पीसीई महंगाई आंकड़े और फेड चेयर के संकेत इस तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे। यदि बाजार को ब्याज दरों में नरमी की संभावना मजबूत दिखती है तो डॉलर और वास्तविक ब्याज दरों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे सोने को समर्थन मिलेगा। इसके उलट महंगाई का दबाव बना रहा और फेड ने सख्त रुख के संकेत दिए तो डॉलर तथा बांड यील्ड में मजबूती आ सकती है। ऐसी स्थिति में सोने की तेजी पर दबाव पड़ना स्वाभाविक होगा।
केंद्रीय बैंकों की खरीद ने दिया मजबूत आधार
केंद्रीय बैंकों की खरीद भी सोने के बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों की शुद्ध सोना खरीद 288.9 टन रही। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही के 177.9 टन से 62 प्रतिशत अधिक है। हालांकि पूरी तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। पहली तिमाही में कमजोर खरीद के कारण 2026 की पहली छमाही में केंद्रीय बैंकों की कुल मांग 2022 के बाद सबसे कम रही। इसलिए मौजूदा तेजी को केवल केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीद का परिणाम बताना सही नहीं होगा। विश्व स्वर्ण परिषद ने दूसरी तिमाही में खरीद बढ़ने के बावजूद पूरे वर्ष केंद्रीय बैंकों की मांग के 2025 से कम रहने की संभावना जताई है। इससे साफ है कि सोने की मौजूदा तेजी के पीछे निवेशकों की रणनीति और अमेरिकी बाजारों में बन रही परिस्थितियां ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ऊंचे भाव में भी निवेश की मांग कायम
विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2026 की पहली छमाही में सोने की कुल मांग 2,522 टन रही। इस मांग का कुल मूल्य रिकॉर्ड 380 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ऊंची कीमतों के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। बढ़ती कीमतें पारंपरिक उपभोक्ता मांग को सीमित कर सकती हैं, लेकिन आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितता के दौर में निवेशक सोने को जोखिम से बचाव के साधन के रूप में देख रहे हैं। यही निवेश मांग कीमतों को ऊंचे स्तर पर टिकाए रखने में मदद कर रही है।
पीसीई और फेड के संकेत पर टिकी अगली चाल
सोना तीन महीने से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में अब आगे की तेजी के लिए बाजार को नए संकेतों की जरूरत होगी। केवल कमजोर डालर के भरोसे तेजी का लंबा दौर कायम रहना मुश्किल माना जा रहा है। इस सप्ताह जुलाई के पीसीई महंगाई आंकड़े और जैक्सन होल सम्मेलन में फेड चेयर के भाषण पर बाजार की विशेष नजर रहेगी। इन दोनों से ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। महंगाई में नरमी का रुझान कायम रहा और फेड का रुख अपेक्षाकृत लचीला दिखा तो सोने को और समर्थन मिल सकता है। लेकिन महंगाई का दबाव बना रहा और फेड ने सख्ती के संकेत दिए तो डॉलर तथा बांड यील्ड में मजबूती लौट सकती है। तब हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार की तस्वीर यह है कि कमजोर डॉलर ने सोने को तीन महीने के शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन यहां से आगे की दिशा अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, बांड बाजार और फेड की नीति से मिलने वाले संकेत तय करेंगे। निवेशकों की नजर अब कीमतों से ज्यादा उन कारकों पर है, जिनके सहारे सोना इस स्तर तक पहुंचा है।


