-विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 2.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि; पांच साल में 500 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित
भारत 19 कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में शोध अब केवल शोध-पत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहेगा। विश्वविद्यालय ने बेहतर रिसर्च को आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़ते हुए इतिहास में पहली बार 47 शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों को कुल 2.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है। इसके साथ ही सीएसजेएमयू रिसर्च को डिजिटल प्लेटफॉर्म, एआई आधारित तकनीक और नई सुविधाओं से जोड़कर अपने शोध ढांचे को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिसर्च बुलेटिन वॉल्यूम-2 में अप्रैल से जून के बीच विश्वविद्यालय से जुड़े 116 शोध आउटपुट को शामिल किया गया है। इनमें शोध-पत्र, परियोजनाएं, नवाचार और अन्य अकादमिक उपलब्धियां शामिल हैं। विश्वविद्यालय अब शोध गतिविधियों को केवल प्रकाशन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें एक व्यवस्थित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने की दिशा में भी काम कर रहा है। पिछले पांच वर्षों में सीएसजेएमयू से बीटेक, एमबीए, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, एनवायरनमेंटल साइंस, साइकोलॉजी समेत विभिन्न विषयों में 500 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। विश्वविद्यालय का मानना है कि शोध को प्रोत्साहन राशि, डिजिटल प्रमाणन और तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ने से आने वाले वर्षों में रिसर्च आउटपुट और बढ़ सकता है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि अगला रिसर्च बुलेटिन अक्टूबर में जारी किए जाने की संभावना है। इसमें अधिक शोधकर्ताओं के शोध-पत्र और उपलब्धियों को शामिल करने की तैयारी है।
रिसर्च चैटबॉट को बनाया जाएगा AI लर्निंग मॉडल
विश्वविद्यालय की डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. नमिता तिवारी ने बताया कि रिसर्च बुलेटिन वॉल्यूम-2 को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां शोध-पत्रों, परियोजनाओं, उपलब्धियों और नवाचारों को डिजिटल मंच मिलता है। शोधकर्ताओं की सहायता के लिए शुरू किए गए AI Research Chatbot को भविष्य में AI Learning Model के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही डायनेमिक डिजिटल सर्टिफिकेट सिस्टम भी शुरू किया गया है। इसके माध्यम से शोधकर्ता Scopus Author ID के जरिए प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। चुनिंदा शोधकर्ताओं के संक्षिप्त वीडियो विश्वविद्यालय की वेबसाइट से जोड़े गए हैं। आरएंडडी सेल की ओर से Unified Research Grievance Redressal Portal और निवारण AI जैसे प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय में 1962 में शुरू हुए थे शोध
सीएसजेएमयू में शोध कार्य की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई थी। उस समय हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल और विज्ञान जैसे विषयों में शोध किया जाता था। वर्तमान में परिसर में 150 से अधिक नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। विज्ञान, कला, वाणिज्य, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और चिकित्सा समेत विभिन्न क्षेत्रों में पाठ्यक्रम बढ़ने के साथ शोध करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगातार बढ़ी है।अब विश्वविद्यालय शोध को केवल डिग्री या अकादमिक उपलब्धि तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रोत्साहन राशि, डिजिटल प्रमाणन, एआई आधारित सहायता और सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 47 शोधकर्ताओं को पहली बार मिला वित्तीय प्रोत्साहन इसी बदलते शोध ढांचे की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
