- कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए प्रस्ताव, रोजगार सेवकों की ईपीएफ समस्या दूर करने के निर्देश; खाली पदों पर भर्ती तेज होगी, आजीविका मिशन की भर्ती और ई-रिक्शा खरीद की जांच
भारत 19
लखनऊ। गांवों के विकास की योजनाओं को रफ्तार देने के साथ उन्हें जमीन पर उतारने वाले मजदूरों और कर्मचारियों की चिंता भी सरकार के एजेंडे में आई है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को ग्राम्य विकास विभाग की समीक्षा में स्वयं सहायता समूहों, वीबीजी-राम-जी योजना के श्रमिकों, रोजगार सेवकों और बीआरपी-सीआरपी कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा देने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा। रोजगार सेवकों की ईपीएफ संबंधी दिक्कतें दूर करने और विभाग तथा उससे जुड़ी इकाइयों में खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेज करने के भी निर्देश दिए गए। वहीं आजीविका मिशन में भर्ती की शिकायतों और ई-रिक्शा खरीद में सामने आई भिन्नता की जांच के लिए तीन-तीन सदस्यीय समितियां गठित करने को कहा गया।
मजदूर-कर्मचारियों के इलाज का रास्ता खुलेगा
ग्राम्य विकास की योजनाओं में काम करने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने की तैयारी है। मौर्य ने स्वयं सहायता समूहों, वीबीजी-राम-जी योजना के श्रमिकों, रोजगार सेवकों और बीआरपी-सीआरपी कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है। रोजगार सेवकों के ईपीएफ भुगतान से जुड़ी समस्याओं का भी समयबद्ध समाधान करने को कहा गया है। यानी ग्रामीण योजनाओं के क्रियान्वयन में लगे कर्मचारियों की लंबित सेवा और वित्तीय समस्याओं को भी समीक्षा में जगह मिली। ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, यूपीएसआईआरडी और डीआरडीए में खाली पदों की स्थिति की समीक्षा की गई। मौर्य ने रिक्त पदों का अधियाचन तत्काल संबंधित आयोगों को भेजने को कहा, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और विभागों में कर्मचारियों की कमी दूर की जा सके।
गांवों में काम और रोजगार की रफ्तार बढ़ाने पर जोर
वीबीजी-राम-जी योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के साथ जिला स्तर पर वित्तीय अधिकारों के स्पष्ट बंटवारे को कहा गया है। जिलों की स्थानीय जरूरत और ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताओं के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। योजना में महिला श्रमिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। ग्राम प्रधानों की समस्याओं के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की समिति बनाने और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने को कहा गया। गांवों की समस्याओं को गांव में ही सुनने और समाधान तक पहुंचाने के लिए ग्राम चौपाल को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। नियमित कैलेंडर के साथ चौपाल आयोजित करने और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। हर शुक्रवार ग्राम चौपाल की प्रगति रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी जाएगी।
आजीविका मिशन की भर्ती पर उठे सवालों की जांच
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में डीएम और बीएमएम की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए गए। समिति शिकायतों की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट देगी। मौर्य ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता देने को कहा। इसी तरह जिलों में ई-रिक्शा खरीद के आंकड़ों में सामने आई भिन्नता की जांच के लिए भी तीन सदस्यीय समिति बनाने को कहा गया है। दोनों मामलों में जांच के बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
गांव की सड़क में एफडीआर तकनीक का जोर
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में एफडीआर तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। कार्बन क्रेडिट योजना की संभावनाओं का भी इस्तेमाल करने को कहा गया। मौर्य ने गांवों और मजरों तक बेहतर सड़क पहुंचाने को प्राथमिकता बताते हुए निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों पर जोर दिया। वृक्षारोपण की समीक्षा में मौर्य ने सिर्फ पौधे लगाने के बजाय उनके संरक्षण और जीवित रहने पर जोर दिया। डीएमएम, बीएमएम, एडीओ और बीडीओ को मिलकर पौधों की देखभाल की कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
अपनों को फायदा पहुंचाया तो कार्रवाई
विभागीय योजनाओं में अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों पर भी सख्ती के संकेत दिए गए। मौर्य ने कहा कि ऐसी शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और मुख्यमंत्री आवास योजना में पात्र परिवारों को समय पर आवास देने तथा विधायक निधि से जुड़े कामों और धनराशि के आवंटन में तेजी लाने को भी कहा गया। बैठक में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास जीएस प्रियदर्शी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
