- कानपुर के चौक सर्राफा कमेटी चुनाव की अनोखी परंपरा, 162 सदस्यों के नाम वाला मतपत्र छपा; 157 ने डाला वोट, सबसे ज्यादा वोट पाने वाले 17 सदस्य होंगे विजयी
Bharat 19/ राजीव सक्सेना, कानपुर। आम चुनाव में मतदाता प्रत्याशी चुनता है, लेकिन कानपुर के चौक सर्राफा कमेटी चुनाव में मतदाता और प्रत्याशी के बीच का फर्क ही खत्म हो जाता है। कमेटी का हर सदस्य खुद चुनाव मैदान में होता है और उसे प्रत्याशी बनने के लिए अलग से नामांकन भी नहीं करना पड़ता। मंगलवार को हुए चुनाव में 162 सदस्यों के नाम वाला मतपत्र तैयार किया गया, जिनमें से 157 सदस्यों ने मतदान किया। हर मतदाता को इन्हीं सदस्यों में से 17 को चुनना था। अब सबसे ज्यादा वोट पाने वाले 17 सदस्य विजेता होंगे और यही 17 आगे कमेटी के पदाधिकारियों का चयन करेंगे।
नामांकन नहीं, हर सदस्य अपने आप प्रत्याशी
चौक सर्राफा कमेटी की चुनावी व्यवस्था की सबसे खास बात यही है कि यहां प्रत्याशी बनने के लिए किसी सदस्य को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करना पड़ता। कमेटी का सदस्य होना ही प्रत्याशी बनने के लिए पर्याप्त है। चुनाव के लिए एक बड़ा मतपत्र तैयार किया जाता है, जिसमें कमेटी के सभी सदस्यों के नाम दर्ज होते हैं। मतदाता इसी सूची में से अपनी पसंद के 17 सदस्यों के नाम चुनता है। यानी जिस सदस्य को वोट देने के लिए मतपत्र में नाम दिखाई देता है, वह स्वयं भी चुनाव में प्रत्याशी की भूमिका में होता है। इस व्यवस्था में अलग से प्रत्याशियों की सूची बनाने या नामांकन प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
सबसे ज्यादा वोट पाने वाले 17 सदस्य होंगे विजेता
चुनाव में कमेटी के सभी सदस्यों में से 17 सदस्यों का चुनाव किया जाता है। मतगणना के बाद जिन 17 सदस्यों को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उन्हें विजयी घोषित किया जाता है। इसके बाद इन 17 निर्वाचित सदस्यों के बीच से ही कमेटी के पदाधिकारियों का चयन किया जाता है। इस तरह चुनाव में सीधे अध्यक्ष, महामंत्री या अन्य पदों के लिए अलग-अलग मतदान नहीं होता, बल्कि पहले 17 सदस्य चुने जाते हैं और फिर वही सदस्य आपस में पदाधिकारियों का चयन करते हैं।
17 वोट से कम-ज्यादा हुए तो मतपत्र रद्द
चौक सर्राफा कमेटी की चुनाव प्रक्रिया का एक और दिलचस्प नियम है। मतदाता को ठीक 17 सदस्यों के नाम पर वोट करना अनिवार्य है। यदि किसी मतपत्र में 17 से एक भी वोट कम या ज्यादा पाया जाता है तो वह मतपत्र निरस्त कर दिया जाता है और उसकी गणना नहीं होती। कमेटी के प्रवक्ता नीरज दीक्षित के अनुसार, इस व्यवस्था से मतदान में किसी एक व्यक्ति के लिए अलग से वोट करने यानी सिंगल वोटिंग की समस्या नहीं रहती। सभी मतदाताओं को 17 सदस्यों का चयन करना होता है, जिससे चुनाव में व्यक्तिगत पसंद के साथ कमेटी के व्यापक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था भी बनी रहती है।
162 सदस्यों के नाम वाला मतपत्र
मंगलवार को हुए चुनाव के लिए कमेटी के सभी 162 सदस्यों के नाम वाला मतपत्र छपवाया गया था। मतदान के दौरान सदस्यों को इसी मतपत्र में से 17 नाम चुनने थे। कुल 162 सदस्यों में से 157 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जबकि पांच सदस्यों ने मतदान नहीं किया। मतदान के बाद मतपत्रों की गिनती शुरू हुई, लेकिन सभी सदस्यों के नाम और प्रत्येक मतपत्र में 17-17 विकल्प होने के कारण मतगणना में समय लग रहा था। देर रात तक गणना जारी थी।
देर रात तय होगा 17 सदस्यों का फैसला
कमेटी के प्रवक्ता नीरज दीक्षित के मुताबिक, मतगणना पूरी होने में काफी देर रात हो सकती है। गणना पूरी होने के बाद ही यह घोषणा की जाएगी कि 162 सदस्यों में से किन 17 सदस्यों को सबसे ज्यादा वोट मिले और वे चौक सर्राफा कमेटी के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद निर्वाचित 17 सदस्य आपस में विचार-विमर्श कर कमेटी के पदाधिकारियों का चयन करेंगे। यही दो-स्तरीय प्रक्रिया चौक सर्राफा कमेटी के चुनाव को आम चुनावों से अलग बनाती है।
चौक सर्राफा कमेटी का चुनाव क्यों है खास
आम चुनावों में मतदाता और प्रत्याशी की भूमिका अलग होती है। प्रत्याशी नामांकन करता है, चुनाव लड़ता है और मतदाता उसके पक्ष में मतदान करता है। लेकिन चौक सर्राफा कमेटी में मतदाता और प्रत्याशी की यह दूरी खत्म हो जाती है। कमेटी का हर सदस्य संभावित विजेता है और हर सदस्य को दूसरे सदस्यों से वोट हासिल करने होते हैं। यही वजह है कि चौक सर्राफा कमेटी का चुनाव कानपुर के कारोबारी संगठनों की चुनावी प्रक्रिया में एक अलग पहचान रखता है। यहां चुनाव किसी एक व्यक्ति या पैनल को चुनने के बजाय पहले 17 सदस्यों की सामूहिक टीम चुनने की प्रक्रिया है। इसके बाद यही टीम कमेटी की जिम्मेदारियां संभालने के लिए पदाधिकारियों का चयन करती है।

