- डीएवी डिग्री कॉलेज के रसायन विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप राव के डिजाइन को यूके पेटेंट; लैपटॉप में एक साथ ए-4 आकार के 10 कागज रखने की सुविधा, उद्योग के साथ मिलकर व्यावसायिक उत्पादन की तैयारी
भारत 19
कानपुर। लैपटॉप के साथ अलग प्रिंटर रखने और जरूरत पड़ने पर प्रिंट निकालने के लिए साइबर कैफे या प्रिंटिंग सेंटर तलाशने की परेशानी खत्म करने की दिशा में कानपुर के प्रोफेसर ने नई तकनीकी परिकल्पना तैयार की है। डीएवी डिग्री कॉलेज कानपुर के रसायन विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप राव ने ‘लैपटॉप विथ प्रिंटर’ का डिजाइन विकसित किया है। इस डिजाइन की खासियत यह है कि लैपटॉप के भीतर ही प्रिंटर को समाहित करने की व्यवस्था होगी। डिजाइन को यूके में पेटेंट भी मिल चुका है। अब प्रोफेसर राव इसके औद्योगिक उत्पादन के लिए इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करने की तैयारी में हैं।
लैपटॉप के भीतर ही होगी पूरी प्रिंटिंग व्यवस्था
प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप राव के मुताबिक प्रस्तावित लैपटॉप में सामान्य लैपटॉप के आकार में ही लैपटॉप और प्रिंटर दोनों को समाहित किया जाएगा। इसके लिए लेजर प्रिंटर में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख हिस्सों को छोटे आकार में विकसित कर लैपटॉप के भीतर फिट करने की परिकल्पना की गई है। इसमें चार्जिंग इलेक्ट्रोड यानी कोरोना तार, फोटोरेसप्टर ड्रम, टोनर कोटेड रोलर, लेजर स्कैनिंग यूनिट और दर्पण जैसे प्रमुख हिस्से शामिल होंगे। इन घटकों को छोटे आकार में व्यवस्थित करके प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया लैपटॉप के भीतर संचालित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इस तकनीक की सबसे बड़ी उपयोगिता यह होगी कि उपयोगकर्ता को दस्तावेज प्रिंट करने के लिए अलग प्रिंटर साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। यात्रा, कारोबारी बैठक, प्रस्तुतीकरण या किसी आकस्मिक जरूरत में लैपटॉप से सीधे प्रिंट निकाला जा सकेगा।
एक साथ 10 ए-4 पेज रखने की व्यवस्था
प्रस्तावित लैपटॉप में कागज रखने के लिए स्टील की बेहद पतली ट्रे लगाई जाएगी। प्रोफेसर राव के मुताबिक इसमें एक साथ ए-4 आकार के करीब 10 सादे कागज रखे जा सकेंगे। ए-4 कागज की मोटाई करीब 0.05 से 0.1 मिलीमीटर होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रे को बेहद पतला रखने की योजना है, ताकि प्रिंटर को लैपटॉप में समाहित करने के बावजूद उसका आकार बहुत अधिक न बढ़े। प्रिंटर को चलाने के लिए अलग बिजली कनेक्शन की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए प्रस्तावित लैपटॉप में सामान्य लैपटॉप से अधिक क्षमता वाली बैटरी लगाने की योजना है, जिससे कंप्यूटिंग और प्रिंटिंग दोनों प्रणालियों को ऊर्जा मिल सके।
यूके में डेटा प्रोसेसिंग उपकरण श्रेणी में पेटेंट
प्रोफेसर राव के इस डिजाइन को इंटरनेशनल डिजाइन क्लासिफिकेशन के वर्जन 15-2025 की क्लास 14 में पेटेंट किया गया है। यह श्रेणी रिकॉर्डिंग, दूरसंचार और डेटा प्रोसेसिंग उपकरणों से संबंधित है। इसके सब-क्लास 02 में डेटा प्रोसेसिंग उपकरण के साथ पेरिफेरल उपकरण और डिवाइस शामिल हैं। यूके पेटेंट मिलने के बाद अब प्रोफेसर राव का फोकस इस डिजाइन को प्रोटोटाइप से औद्योगिक उत्पादन तक पहुंचाने पर है। इसके लिए इंडस्ट्री के साथ साझेदारी की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
लेजर प्रिंटर की तकनीक पर आधारित होगा सिस्टम
प्रोफेसर राव के अनुसार लैपटॉप में प्रस्तावित प्रिंटर लेजर प्रिंटिंग की मूल तकनीक पर काम करेगा। जब उपयोगकर्ता किसी फाइल को प्रिंट करने का कमांड देगा तो प्रिंटर का प्रोसेसर सबसे पहले उस डेटा को समझेगा। इसके बाद फोटोसेंसिटिव ड्रम को कोरोना तार के जरिए एकसमान विद्युत आवेश दिया जाएगा। लेजर बीम घूमते हुए दर्पण के माध्यम से ड्रम पर पड़ेगी। जिस स्थान पर प्रिंट तैयार होना है, वहां लेजर के कारण विद्युत आवेश बदलेगा और ड्रम पर एक अदृश्य विद्युत पैटर्न तैयार होगा। इसके बाद टोनर पाउडर ड्रम के उन्हीं हिस्सों पर चिपकेगा जहां लेजर के कारण आवेश बदला है। कागज रोलर के माध्यम से आगे बढ़ेगा और ड्रम से टोनर कागज पर स्थानांतरित होगा। अंतिम चरण में फ्यूजर यूनिट का गर्म रोलर टोनर को ताप और दबाव की मदद से कागज पर स्थायी रूप से चिपका देगा। इस तरह लैपटॉप से दिए गए प्रिंट कमांड के अनुसार फाइल की सामग्री कागज पर प्रिंट हो जाएगी।
कारोबारी और पेशेवरों के लिए उपयोगी हो सकता है गैजेट
इस तकनीक का सबसे बड़ा संभावित लाभ उन लोगों को हो सकता है जिन्हें काम के दौरान तुरंत दस्तावेज की हार्ड कॉपी की जरूरत पड़ती है। बिजनेसमैन, शोधकर्ता, शिक्षक, विद्यार्थी, अधिकारी और दूसरे पेशेवर यात्रा के दौरान अनुबंध, रिपोर्ट, प्रस्तुतीकरण या अन्य जरूरी दस्तावेज प्रिंट कर सकेंगे। अभी लैपटॉप और प्रिंटर को अलग-अलग रखने के लिए अतिरिक्त जगह, बिजली और कनेक्शन की जरूरत होती है। इन दोनों उपकरणों को एक ही सिस्टम में समाहित करने की कोशिश से पोर्टेबिलिटी और तत्काल प्रिंटिंग दोनों सुविधाएं एक साथ मिल सकती हैं। हालांकि, पेटेंट मिलने के बाद इसे बाजार में उतारने के लिए अभी कई तकनीकी चरण बाकी होंगे। इनमें प्रिंटर के हिस्सों का लघुकरण, बैटरी क्षमता, गर्मी का प्रबंधन, टोनर की व्यवस्था, कागज की फीडिंग, प्रिंट गुणवत्ता और उत्पादन लागत प्रमुख चुनौतियां होंगी।
अब डिजाइन से बाजार तक पहुंचाने की तैयारी
प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप राव के डिजाइन को यूके पेटेंट मिलने के बाद इसकी अगली चुनौती व्यावसायिक उत्पादन और बाजार में उपयोग योग्य उत्पाद तैयार करना है। इंडस्ट्री के साथ मिलकर इस दिशा में काम होने पर भविष्य में ऐसा डिजिटल गैजेट तैयार हो सकता है जिसमें लैपटॉप और प्रिंटर अलग-अलग उपकरण न होकर एक ही सिस्टम का हिस्सा होंगे। यानी जिस लैपटॉप को अभी केवल दस्तावेज तैयार करने और देखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, प्रस्तावित तकनीक उसे जरूरत पड़ने पर वहीं तत्काल प्रिंट निकालने में भी सक्षम बनाएगी।

