कानपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा एवं बचाव जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान के दूसरे दिन होटल संचालकों और प्रबंधकों को आग से बचाव, फायर सेफ्टी उपकरणों के उपयोग और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में करीब 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए समय पर सही कार्रवाई से जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
KANPUR/ कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आयोजित तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा एवं बचाव जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान का दूसरा दिन शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह अभियान 26 जून से 28 जून 2026 तक चलाया जा रहा है। दूसरे दिन पुलिस कार्यालय सभागार में होटल संचालकों और व्यवस्थापकों के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पुलिस, फायर सर्विस और केस्को के अधिकारियों ने किया मार्गदर्शन
कार्यक्रम का समन्वय नोडल अधिकारी एवं अपर पुलिस उपायुक्त (अभिसूचना) महेश कुमार ने किया।
इस अवसर पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा, फायर सर्विस, सिविल डिफेंस और केस्को के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने होटल प्रबंधन से जुड़े लोगों को अग्नि सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
फायर एक्सटिंग्विशर के सही उपयोग का हुआ प्रदर्शन
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि आग लगने की स्थिति में शुरुआती प्रतिक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है।
इसके अलावा विभिन्न प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर के सुरक्षित और सही उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। प्रतिभागियों को अलग-अलग प्रकार की आग बुझाने की तकनीकों की जानकारी दी गई। इससे होटल संचालकों को आपातकालीन स्थिति में प्रभावी कार्रवाई करने की जानकारी मिली।
प्राथमिक उपचार की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में केवल आग बुझाने तक ही प्रशिक्षण सीमित नहीं रहा। विशेषज्ञों ने आग से झुलसने या अन्य दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) देने के तरीके भी बताए।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद सही प्राथमिक उपचार मिलने से गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसलिए होटल कर्मचारियों को फर्स्ट एड का बुनियादी प्रशिक्षण भी आवश्यक है।
शुरुआती मिनटों में सतर्कता सबसे जरूरी
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि किसी भी अग्निकांड में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं।
यदि संबंधित कर्मचारी पहले से प्रशिक्षित हों और सतर्कता के साथ काम करें, तो जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल पर भी जोर दिया गया।
होटलों में सुरक्षा मानकों के पालन पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में होटल संचालकों को सलाह दी गई कि वे अपने प्रतिष्ठानों में लगे अग्निशमन उपकरणों का नियमित रखरखाव कराएं।
साथ ही विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन करने, वायरिंग की समय-समय पर जांच कराने और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने की भी अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन किसी भी दुर्घटना के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
250 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में होटल संचालकों और व्यवस्थापकों सहित कुल 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न सुरक्षा उपायों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीके भी सीखे। पुलिस कमिश्नरेट का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना है।
जनसुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
पुलिस कमिश्नरेट का मानना है कि अग्नि सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें होटल संचालकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसी वजह से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इससे आपातकालीन स्थितियों में लोगों की तैयारी बेहतर होगी और दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

