कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन की ओर से 28 जून 2026 को विष्णुपुरी स्थित सेठ मोतीलाल खेड़िया सनातन धर्म इंटर कॉलेज में निःशुल्क कलारीपयट्टू छात्र कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सैयद अयूब प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य भारत की प्राचीन युद्धकला को बढ़ावा देना, युवाओं में आत्मरक्षा की भावना विकसित करना और शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी दिया जाएगा।
KANPUR/ कानपुर में भारत की प्राचीन युद्धकला कलारीपयट्टू को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पहल की गई है। कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन की ओर से 28 जून 2026 (रविवार) को निःशुल्क छात्र कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
यह कार्यशाला सुबह 8:00 बजे से विष्णुपुरी स्थित सेठ मोतीलाल खेड़िया सनातन धर्म इंटर कॉलेज में शुरू होगी। आयोजन में शहर के बच्चों, युवाओं और खेल प्रेमियों को भाग लेने का अवसर मिलेगा।
सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए खुला रहेगा आयोजन
इस कार्यशाला में बालक, बालिका, महिला और पुरुष सभी भाग ले सकते हैं। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में किसी प्रकार का प्रशिक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा, प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को Certificate of Participation भी प्रदान किया जाएगा। इससे युवाओं को नई खेल विधा सीखने के साथ प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।
राष्ट्रीय खिलाड़ी सैयद अयूब देंगे प्रशिक्षण
कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सैयद अयूब की मौजूदगी होगी। वे विशेष प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को कलारीपयट्टू की मूल तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे।
इसके साथ ही प्रतिभागियों को आत्मरक्षा के आधुनिक तरीके, शारीरिक संतुलन, फुर्ती, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाएंगी।
प्रशिक्षण के दौरान पारंपरिक भारतीय युद्धकला की मूल अवधारणाओं को भी समझाया जाएगा। इससे प्रतिभागियों को इस प्राचीन कला के इतिहास और महत्व की जानकारी मिलेगी।
भारत की सबसे प्राचीन युद्धकलाओं में शामिल है कलारीपयट्टू
कलारीपयट्टू को भारत की सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट्स में गिना जाता है। इसकी शुरुआत दक्षिण भारत, विशेष रूप से केरल से मानी जाती है।
यह युद्धकला केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं है। बल्कि यह शरीर की लचक, संतुलन, गति, मानसिक एकाग्रता और अनुशासन विकसित करने में भी सहायक मानी जाती है।
आज के समय में कई युवा फिटनेस और आत्मरक्षा के लिए इस पारंपरिक कला को सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में कानपुर में आयोजित यह कार्यशाला नई पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
अनिल कुशवाहा के निर्देशन में होगा आयोजन
कार्यशाला का आयोजन कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन के सचिव अनिल कुशवाहा के निर्देशन में किया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से हर वर्ग के लोगों तक भारतीय पारंपरिक युद्धकला को पहुंचाना है।
इसी वजह से प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक छात्र और युवा इसमें शामिल हो सकें।
विद्यालयों और अभिभावकों से की गई अपील
कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन ने शहर के सभी विद्यालयों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से इस कार्यशाला में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
आयोजकों का मानना है कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। वहीं नियमित अभ्यास से बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
इसके अलावा, खेल गतिविधियों में भाग लेने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों बेहतर होते हैं। इसलिए युवाओं को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है।
आत्मरक्षा और फिटनेस को मिलेगा बढ़ावा
आज के समय में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
ऐसी कार्यशालाएं बच्चों और युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और शारीरिक मजबूती विकसित करने का अवसर देती हैं।
यदि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं, तो कानपुर में भी कलारीपयट्टू जैसी पारंपरिक भारतीय युद्धकला को नई पहचान मिल सकती है।
28 जून को आयोजित होने वाली यह निःशुल्क कलारीपयट्टू कार्यशाला कानपुर के युवाओं और बच्चों के लिए सीखने का अच्छा अवसर है। राष्ट्रीय खिलाड़ी के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को आत्मरक्षा, फिटनेस और अनुशासन का प्रशिक्षण मिलेगा।
आयोजकों को उम्मीद है कि इस पहल से अधिक से अधिक युवा भारत की प्राचीन युद्धकला से जुड़ेंगे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

