KANPUR/ कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली महिला को आयकर विभाग की ओर से 16 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस भेजा गया। नोटिस मिलने के बाद महिला और उसका परिवार सदमे में आ गया। महिला का आरोप है कि उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोला गया और उसी खाते में करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया गया। मामला पनकी थाना क्षेत्र के रतनपुर चौकी इलाके का है। पीड़िता अर्चना मिश्रा का कहना है कि उन्हें इस बैंक खाते की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन उनके नाम पर लगभग 13 करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त और करीब 3 करोड़ रुपये के अन्य वित्तीय लेनदेन दर्ज किए गए।
कौन हैं अर्चना मिश्रा?
अर्चना मिश्रा (45) कानपुर के पनकी क्षेत्र की रहने वाली हैं और ई-रिक्शा चलाकर अपने दो बेटों का पालन-पोषण करती रही हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनका वैवाहिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। पति के साथ लगातार विवाद और घरेलू हिंसा के कारण उन्होंने वर्ष 2017 में तलाक ले लिया। पति से अलग होने के बाद अर्चना अपने दो बेटों उज्जवल और उत्कर्ष के साथ रहने लगीं। इसी दौरान उन्हें पता चला कि वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और परिवार चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाना शुरू किया। अर्चना का दावा है कि वह कानपुर की पहली महिला ई-रिक्शा चालक थीं, जिन्हें इस पहल के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
लोन दिलाने के नाम पर हुआ कथित धोखा
अर्चना ने बताया कि इलाज और बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात अजय गुप्ता नामक व्यक्ति से हुई। अर्चना के अनुसार अजय ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उसके परिचित बैंक से आसानी से लोन दिला सकते हैं। इस भरोसे में उन्होंने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज उसे सौंप दिए। कुछ दिनों बाद अजय उन्हें अपने मामा संजीव गुप्ता के पास लेकर गया, जहां एक निजी बैंक में उनके नाम से खाता खोला गया। उन्हें बताया गया कि लोन की राशि इसी खाते में आएगी। हालांकि कई महीने बीत जाने के बाद भी लोन स्वीकृत नहीं हुआ। जब उन्होंने अपने दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें टालना शुरू कर दिया और बाद में कथित रूप से दस्तावेज लौटाने से भी इंकार कर दिया।
करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
समय बीतने के साथ अर्चना अपनी बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहीं। लेकिन बाद में उन्हें तब झटका लगा जब आयकर विभाग की ओर से 16 करोड़ रुपये के टैक्स से संबंधित नोटिस मिला। जांच में सामने आया कि उनके नाम पर खोले गए खाते में लगभग 16 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन दर्ज हैं। इनमें करीब 13 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री और 3 करोड़ रुपये के अन्य लेनदेन शामिल बताए जा रहे हैं। महिला का कहना है कि उसने कभी इतना पैसा देखा तक नहीं और न ही उसे ऐसे किसी खाते की जानकारी थी।
बीमारी और संघर्षों से भरी जिंदगी
अर्चना के अनुसार कैंसर का इलाज कराने के लिए उन्हें लगातार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। मई 2025 में उनका ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद उन्होंने ई-रिक्शा चलाना भी बंद कर दिया। परिवार चलाने के लिए वह नौकरी की तलाश में गुजरात के सूरत शहर भी गईं। इसी दौरान उन्हें अपने नाम पर हुए कथित वित्तीय घोटाले की जानकारी मिली।
पुलिस चौकी में शिकायत, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
महिला का आरोप है कि उन्होंने मामले की शिकायत रतनपुर चौकी में की थी। वहां मौजूद चौकी प्रभारी ने उनसे कथित रूप से यह लिखवाया कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहतीं और आगे की कार्रवाई अदालत के माध्यम से की जाएगी। अर्चना का कहना है कि बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनसे गलत तरीके से बयान लिया गया है। जब उन्होंने दोबारा कार्रवाई की मांग की तो कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पुलिस कमिश्नर के पास पहुंची पीड़िता
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने से परेशान अर्चना सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं। वहां शिकायत सुनने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर संबंधित चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित को लाइन हाजिर कर दिया गया और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए।
पुलिस क्या कह रही है?
सहायक पुलिस अधीक्षक अमरनाथ के अनुसार महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक खाते, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पहचान चोरी (Identity Theft) और वित्तीय धोखाधड़ी का गंभीर उदाहरण हो सकता है। आज के डिजिटल दौर में आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लोगों के नाम पर फर्जी खाते खोले जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता और दस्तावेजों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। कानपुर की अर्चना मिश्रा का मामला केवल एक महिला की परेशानी नहीं बल्कि पहचान चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे की ओर भी संकेत करता है। एक तरफ महिला कैंसर, आर्थिक तंगी और पारिवारिक संघर्षों से जूझती रही, वहीं दूसरी ओर उसके नाम पर करोड़ों रुपये के लेनदेन होने का दावा सामने आया। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।



