Hot Topics

NEET-SS कटऑफ घटाने के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

  • 50वें से 30वें पर्सेंटाइल किए गए क्वालिफाइंग मानदंड पर उठे कानूनी सवाल; 1,857 खाली सुपर-स्पेशियलिटी सीटों के लिए विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड शुरू, करीब 6,000 अतिरिक्त उम्मीदवारों को मौका मिलने का अनुमान

भारत 19

नई दिल्ली। NEET-SS 2025 की क्वालिफाइंग कटऑफ को 50वें से घटाकर 30वें पर्सेंटाइल करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। चुनौती नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की 22 सितंबर को जारी अधिसूचना से जुड़ी है। इस अधिसूचना के तहत संबंधित NEET-SS प्रश्नपत्र समूह में 30वें पर्सेंटाइल या उससे ऊपर अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को क्वालिफाइड माना गया है। NBEMS ने संशोधित परिणाम मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) को भी भेज दिया है।

कटऑफ में बदलाव का आधार NEET-SS 2025 की दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद बची 1,857 सुपर-स्पेशियलिटी सीटें हैं। इनमें 1,094 DM/MCh और 763 DNB-SS सीटें शामिल हैं। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 30वें पर्सेंटाइल तक कटऑफ घटाने से करीब 6,000 अतिरिक्त उम्मीदवार विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड में शामिल हो सकेंगे।

50 से 30 पर्सेंटाइल तक कैसे पहुंचा मामला

NEET-SS सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की परीक्षा है। 2025 की काउंसलिंग के दो दौर पूरे होने के बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। 10 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने खाली सीटों की संख्या को देखते हुए केंद्र से क्वालिफाइंग कटऑफ घटाने के विकल्प पर पुनर्विचार करने को कहा था। इसके बाद केंद्र ने 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना संशोधित प्रस्ताव रखा। केंद्र ने बताया कि 1,857 खाली सीटों को भरने के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50 से घटाकर 30 किया जाएगा। अदालत ने केंद्र की ओर से रखी गई इस व्यवस्था के आधार पर आगे की प्रक्रिया के निर्देश दिए।

NBEMS ने जारी किया संशोधित क्वालिफाइंग मानदंड

केंद्र के निर्णय के बाद NBEMS ने 22 सितंबर को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। बोर्ड के मुताबिक अब प्रत्येक संबंधित प्रश्नपत्र समूह में 30वें पर्सेंटाइल या उससे अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवार क्वालिफाइड माने जाएंगे। संशोधित परिणाम MCC को उपलब्ध करा दिया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रश्नपत्र समूह के अनुसार पहले जारी की गई रैंक में बदलाव नहीं किया गया है। बदलाव केवल क्वालिफाइंग मानदंड में हुआ है, जिसके कारण पहले 50वें पर्सेंटाइल की सीमा से नीचे रहने वाले कुछ उम्मीदवार अब काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए हैं।

1,857 सीटों के लिए शुरू हुआ विशेष राउंड

कटऑफ में बदलाव के बाद MCC ने NEET-SS 2025 के लिए विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड का कार्यक्रम जारी कर दिया है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार संस्थानों की सीट मैट्रिक्स का सत्यापन 24 सितंबर को है। उम्मीदवार 25 से 28 सितंबर तक पंजीकरण और शुल्क भुगतान कर सकते हैं। च्वाइस फिलिंग 29 सितंबर तक होगी, सीट आवंटन का परिणाम 30 सितंबर को आएगा और रिपोर्टिंग 1 से 6 अक्टूबर तक होगी। इस विशेष राउंड का उद्देश्य उन सुपर-स्पेशियलिटी सीटों को भरना है जो सामान्य काउंसलिंग के दो दौर के बाद भी खाली रह गई हैं।

करीब 6,000 अतिरिक्त डॉक्टर होंगे पात्र

केंद्र के मुताबिक कटऑफ 30वें पर्सेंटाइल पर आने के बाद करीब 6,000 अतिरिक्त उम्मीदवार विशेष स्ट्रे राउंड में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। यानी 1,857 खाली सीटों के मुकाबले संभावित उम्मीदवारों का पूल लगभग तीन गुना होगा। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन उम्मीदवारों ने पहले के राउंड में सीट ज्वाइन कर ली है, उन्हें इस विशेष राउंड में अपग्रेडेशन का मौका नहीं दिया जाएगा। इसका कारण यह बताया गया कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद सीट बदलने से नई सीट खाली हो सकती है और फिर उसे भरने के लिए अलग प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

विवाद का केंद्र अब कटऑफ बदलने की प्रक्रिया

कटऑफ कम करने को चुनौती दिए जाने के बाद मामला केवल खाली सीटों को भरने तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत के सामने यह सवाल उठ सकता है कि काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद क्वालिफाइंग मानदंड में बदलाव का उम्मीदवारों की पात्रता और प्रवेश प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर, आधिकारिक रिकॉर्ड में कटऑफ घटाने का प्रमुख आधार खाली सुपर-स्पेशियलिटी सीटों का उपयोग और उपलब्ध प्रशिक्षण क्षमता को खाली न रहने देना बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 17 सितंबर के आदेश में भी केंद्र की इसी स्थिति को दर्ज किया गया है।

अब काउंसलिंग के बीच अदालत की चुनौती

फिलहाल 30वें पर्सेंटाइल का संशोधित मानदंड लागू कर विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। MCC के कार्यक्रम के अनुसार 25 सितंबर से पंजीकरण शुरू होना है और 30 सितंबर को सीट आवंटन का परिणाम प्रस्तावित है। ऐसे में इस चुनौती का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि कटऑफ में बदलाव के आधार पर नए उम्मीदवारों को काउंसलिंग का मौका मिल चुका है और विशेष राउंड की प्रक्रिया भी तय हो गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि 22 सितंबर की NBEMS अधिसूचना और उसके आधार पर आगे बढ़ रही काउंसलिंग प्रक्रिया पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News