- 50 पुलिसकर्मियों ने दोनों गेट बंद कर कार्यालय घेरा, ड्रोन से निगरानी; कैश और प्रवर्तन कक्ष की रकम जांच के घेरे में, CCTV फुटेज व रिकॉर्ड जब्त
भारत 19
कानपुर। सोमवार को कानपुर आरटीओ कार्यालय में अचानक ऐसा पुलिस घेरा डाला कि अंदर मौजूद एजेंटों को संभलने का मौका नहीं मिला। एसओजी समेत करीब 50 पुलिसकर्मियों ने कार्यालय को चारों ओर से घेर लिया, दोनों प्रवेश द्वार बंद कर दिए और ड्रोन से पूरे परिसर पर नजर रखी। कार्रवाई शुरू होते ही अफरातफरी मच गई। एजेंट भागने लगे, लेकिन पुलिस ने दौड़ाकर 22 को पकड़ लिया, जबकि कुछ दीवार फांदकर निकल गए। कार्रवाई सिर्फ एजेंटों तक सीमित नहीं रही। जांच टीम सीधे कैश डिपार्टमेंट और प्रवर्तन कक्ष तक पहुंची, जहां रखी नकदी और उसके हिसाब-किताब की पड़ताल की गई। एक कर्मचारी के पास मिले एक लाख रुपये को लेकर जवाब मांगा गया, जबकि दूसरे के पास 15 हजार रुपये मिले। अलग-अलग स्थानों पर मिली अन्य रकम भी जांच के दायरे में है। प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में नकदी के रखरखाव में विसंगतियां मिली हैं।
दोनों गेट बंद, फिर शुरू हुई भागदौड़
आरटीओ कार्यालय में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई पूरी तैयारी के साथ की गई। टीम पहुंचते ही कार्यालय के दोनों मुख्य प्रवेश द्वार बंद करा दिए गए। भारी पुलिस बल और एसओजी की मौजूदगी के बीच परिसर से बाहर निकलने की कोशिश करने वाले एजेंटों को पकड़ने के लिए पुलिस ने दौड़ लगाई। 22 एजेंट मौके पर पकड़ लिए गए, जबकि कई लोग दीवार फांदकर भागने में सफल रहे। कार्रवाई के दौरान एक अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी, जिसे बाद में नियंत्रित कर लिया गया। यह पूरी कार्रवाई लंबे समय से आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की मिल रही शिकायतों के बाद की गई। अब जांच टीम एजेंटों की सक्रियता से लेकर कार्यालय के भीतर कामकाज के तौर-तरीकों तक की परतें खोलने में जुटी है।

कैश से प्रवर्तन कक्ष तक पहुंची जांच
एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके ने खुद प्रवर्तन कक्ष में दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान क्षेत्रीय निरीक्षक संतोष यादव से भी बंद कमरे में पूछताछ की गई। कैश डिपार्टमेंट में कर्मचारी विपिन कुमार के पास 15 हजार रुपये मिले। वहीं प्रवर्तन कक्ष में तैनात चालान से जुड़े कर्मचारी मृदुल मिश्रा के पास रखे एक लाख रुपये को लेकर पूछताछ की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह रकम का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके। अलग-अलग स्थानों पर सात हजार रुपये समेत अन्य रकम भी जांच टीम के रडार पर आई है। प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में नकदी प्रबंधन को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। अब यह देखा जा रहा है कि कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में मिली रकम का आधिकारिक रिकॉर्ड से कितना मिलान होता है।
बायोमीट्रिक काउंटर पर भी पहुंची SOG
जांच टीम सारथी भवन स्थित बायोमीट्रिक काउंटर नंबर छह तक भी पहुंची। यहां आजमगढ़ निवासी कर्मचारी मुजाहिद फारूकी से कामकाज को लेकर पूछताछ की गई। कर्मचारी ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण दोपहर 12 बजे तक बायोमीट्रिक प्रक्रिया नहीं हो सकी। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 3:30 बजे के बीच सिर्फ 15 बायोमीट्रिक किए जाने की जानकारी दी गई। जांच टीम ने इस जानकारी को भी रिकॉर्ड में शामिल किया है और अब यह देखा जाएगा कि तकनीकी खराबी के दौरान कार्यालय की अन्य गतिविधियां किस तरह संचालित हो रही थीं।
CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड से खुलेगी पूरी कहानी
एसडीएम सदर अनुभव सिंह के अनुसार, आरटीओ कार्यालय में लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए हैं। संदिग्ध भूमिका वाले पांच से छह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। अब जांच की असली दिशा जब्त रिकॉर्ड तय करेगा। सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आरटीओ परिसर में एजेंटों की भूमिका क्या थी, वे किस तरह सक्रिय थे और उनकी गतिविधियों में विभागीय कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं। नकदी, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को भेजी जाएगी।
