- एक महीने के काम चार महीने में भी नहीं पूरे, उद्योगों की शिकायतों के बीच 498 करोड़ से बिजली नेटवर्क सुधारने की तैयारी
Bharat 19/ कानपुर। केस्को की व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर औद्योगिक उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। उद्यमियों का आरोप है कि केंद्रीकरण के बाद पहले स्थानीय स्तर पर एक माह में पूरा हो जाने वाला बिजली संबंधी काम अब चार-चार माह में भी नहीं हो रहे। सोमवार को उन्होंने यह मुद्दा केस्को प्रबंध निदेशक नेहा जैन के सामने उठाया। दूसरी ओर सांसद रमेश अवस्थी ने अधिकारियों से 498 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना की प्रगति जानी।
लोड बढ़ाकर पेनाल्टी लगाने पर आपत्ति
उद्यमियों ने कहा कि दिक्कत केवल बिजली कटौती की नहीं है। लोड संशोधन, नए कनेक्शन, बिलिंग और तकनीकी शिकायतों में भी कार्रवाई की रफ्तार धीमी हुई है। स्थानीय स्तर पर समाधान की गुंजाइश कम होने से कई मामले अलग-अलग स्तरों पर अटक रहे हैं। उद्यमियों ने आरोप लगाया कि केस्को उपभोक्ता का लोड बढ़ाकर उसी आधार पर पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई करता है। उनका कहना था कि लोड बढ़ाने की जरूरत होने पर पहले संबंधित उपभोक्ता को नोटिस दिया जाए और उसका पक्ष सुना जाए।
चकेरी-रूमा में फॉल्ट और कटौती का मुद्दा
उमंग अग्रवाल ने चकेरी और रूमा औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती और फॉल्ट की समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि शनिवार को पोल टेढ़ा होने और तार जमीन पर गिरने की शिकायत के बाद भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। रविवार शाम एमडी कार्यालय में शिकायत के बाद काम हुआ। संबंधित एसडीओ पर उद्यमियों से दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया गया। रूमा में नए कनेक्शन मिलने के महीनों बाद भी बिल नहीं मिलने की शिकायत पर एमडी ने कार्रवाई के निर्देश दिए। उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग नोडल अधिशासी अभियंता नियुक्त करने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए अधिकारियों को सीधे जोड़ने की मांग की।
498 करोड़ से नेटवर्क सुधारने की तैयारी
सांसद रमेश अवस्थी को केस्को अधिकारियों ने बताया कि 498 करोड़ रुपये की योजना के तहत छह नए विद्युत उपकेंद्र और 709 वितरण परिवर्तक लगाए जा रहे हैं। ओवरलोडेड फीडरों का विभाजन, नए फीडरों का निर्माण और वितरण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का काम भी चल रहा है। करीब 235 करोड़ रुपये की स्काडा परियोजना के तहत 818 रिंग मेन यूनिट स्थापित की जा रही हैं। इससे बिजली नेटवर्क की रियल टाइम निगरानी, फॉल्ट की पहचान और आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उद्यमियों ने भी औद्योगिक फीडरों को स्काडा से जोड़ने की मांग उठाई है। बिजनेस प्लान के तहत करीब 60 करोड़ रुपये से वितरण व्यवस्था और उपकरणों की सुरक्षा से जुड़े काम कराए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद एक वर्ष में बिजली व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा।
