- पुणे में महिला छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी के बयान से शुरू हुआ विवाद, फडणवीस ने महिला आरक्षण और योगी आदित्यनाथ ने मनुस्मृति के मुद्दे पर साधा निशाना
भारत 19 नई दिल्ली। महिलाओं की आजादी और पितृसत्तात्मक सोच पर राहुल गांधी की टिप्पणी ने नया सियासी टकराव खड़ा कर दिया है। पुणे में महिला छात्रों से संवाद के दौरान राहुल ने उस सामाजिक सोच पर सवाल उठाए, जो महिलाओं के जीवन और फैसलों पर नियंत्रण की बात करती है। भाजपा ने इस बयान को दो अलग राजनीतिक मुद्दों से जोड़कर पलटवार किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महिला आरक्षण को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कांग्रेस नेता पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने पुणे में छात्रों के साथ संवाद के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता, सामाजिक दबाव और पितृसत्तात्मक व्यवस्था का मुद्दा उठाया था। उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं को पिता, पति और पुत्र के अधीन रखने संबंधी अवधारणा का उल्लेख करते हुए सवाल खड़े किए। राहुल का कहना था कि महिला की पहचान किसी रिश्ते से तय नहीं होनी चाहिए और उसे अपने जीवन के फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं से पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की अपील की और भाजपा-RSS की विचारधारा पर भी हमला बोला। राहुल के इस बयान के बाद भाजपा ने इसे केवल सामाजिक बहस तक सीमित नहीं रहने दिया।
महिला आरक्षण से फडणवीस का पलटवार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के महिला सशक्तीकरण वाले बयान पर सवाल उठाते हुए महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा सामने रखा। उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक रुख पर सवाल खड़े किए और राहुल गांधी को महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। फडणवीस के बयान के साथ ही विवाद का पहला राजनीतिक मोड़ आया। राहुल गांधी जहां महिलाओं की सामाजिक स्वतंत्रता और पितृसत्ता पर सवाल उठा रहे थे, वहीं भाजपा ने बहस को संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी तक पहुंचा दिया। भाजपा की रणनीति साफ थी, महिला सशक्तीकरण के सवाल पर राहुल गांधी को केवल बयान तक सीमित रखने के बजाय कांग्रेस के राजनीतिक रिकॉर्ड और महिला आरक्षण के मुद्दे पर उसके रुख को बहस के केंद्र में लाना।
योगी की एंट्री से मनुस्मृति पर बढ़ा विवाद
विवाद को दूसरा और ज्यादा वैचारिक मोड़ तब मिला, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। योगी ने राहुल के बयान को भारत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। इसके साथ ही बहस का दायरा और बढ़ गया। राहुल गांधी जिस पितृसत्तात्मक सोच और सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे, भाजपा ने उसी बहस को भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता के सवाल से जोड़ दिया। अब भाजपा का पलटवार दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ फडणवीस महिला आरक्षण के जरिए कांग्रेस के राजनीतिक रुख पर सवाल उठा रहे हैं, दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ मनुस्मृति के मुद्दे को सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर राहुल गांधी की वैचारिक राजनीति को चुनौती दे रहे हैं।
राहुल के बयान से बदला बहस का मैदान
राहुल गांधी का मूल संदेश महिलाओं की आजादी और बराबरी पर केंद्रित था। उन्होंने महिलाओं के जीवन पर सामाजिक और पारिवारिक नियंत्रण की मानसिकता पर सवाल उठाए। लेकिन भाजपा ने जवाब में दो अलग मुद्दे खड़े कर दिए—महिला आरक्षण और मनुस्मृति। यहीं से यह विवाद सामान्य बयानबाजी से आगे बढ़ गया। अब सवाल केवल राहुल गांधी के बयान का नहीं है। राजनीतिक लड़ाई इस बात पर केंद्रित हो गई है कि महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर नैरेटिव किसके पक्ष में जाता है और भारतीय परंपरा की व्याख्या को लेकर कांग्रेस और भाजपा किस तरह आमने-सामने खड़े होते हैं।
कांग्रेस के लिए भी सियासी चुनौती
राहुल गांधी ने पुणे के कार्यक्रम में युवाओं और खासकर महिला छात्रों के बीच सामाजिक बराबरी का संदेश देने की कोशिश की थी। लेकिन भाजपा के पलटवार ने कांग्रेस के सामने अब दो मोर्चे खोल दिए हैं। पहला, महिला आरक्षण और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल पर भाजपा के आरोपों का जवाब देना। दूसरा, मनुस्मृति और सांस्कृतिक विरासत को लेकर उठाए गए सवालों का राजनीतिक मुकाबला करना। यानी पुणे में महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्ता पर शुरू हुई बहस अब महिला सशक्तीकरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक अस्मिता के तीन अलग-अलग मोर्चों पर पहुंच गई है।
एक बयान, दो राजनीतिक जवाब
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया को देखें तो उसकी रणनीति भी साफ दिखाई देती है। फडणवीस ने महिला आरक्षण के जरिए राहुल गांधी के राजनीतिक दावों पर सवाल उठाया, जबकि योगी आदित्यनाथ ने मनुस्मृति के मुद्दे पर कांग्रेस को वैचारिक घेरे में लेने की कोशिश की। इसी वजह से यह विवाद केवल राहुल गांधी के एक बयान पर प्रतिक्रिया नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में यह कांग्रेस और भाजपा के बीच महिला अधिकारों, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक विरासत को लेकर चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई का नया मुद्दा बन सकता है।


