Hot Topics

भारतीय बाजार में लौट रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा

  • जनवरी से जुलाई तक लगातार शुद्ध निकासी के बाद अगस्त में बदला रुख; 21 अगस्त तक विदेशी निवेशक 2,514 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार बने

भारत 19
नई दिल्ली। कई महीनों तक लगातार बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत के संकेत उभरने लगे हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से जुलाई तक विदेशी निवेशक हर महीने भारतीय बाजार से निवेश से अधिक धन निकालते रहे, लेकिन अगस्त में तस्वीर बदलती नजर आ रही है। 21 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों की खरीदारी बिकवाली पर भारी पड़ गई है और वे इस महीने शुद्ध खरीदार बन गए हैं।

यह बदलाव भले ही अभी शुरुआती चरण में हो, लेकिन वर्षभर विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से दबाव झेल रहे भारतीय बाजार के लिए इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यदि अगस्त के बाकी दिनों और सितंबर में भी विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में विदेशी भरोसे की वापसी का रुख और मजबूत हो सकता है।

अगस्त में पहली बार निवेश ने पछाड़ी बिकवाली

21 अगस्त तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 2,06,954.93 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि 2,04,440.65 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई। इस तरह अगस्त में अब तक 2,514.28 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है। रकम बहुत बड़ी नहीं दिखती, लेकिन इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि 2026 में इससे पहले हर महीने विदेशी निवेशकों की बिकवाली निवेश से अधिक रही थी। मार्च में निकासी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद से निकासी लगातार घटती गई और अगस्त में पहली बार स्थिति शुद्ध निवेश के पक्ष में जाती दिखाई दी।

मार्च में लगा था सबसे बड़ा झटका

जनवरी : 41,435.22 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
फरवरी : 6,640.78 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
मार्च : 1,22,540.41 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
अप्रैल : 70,135.46 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
मई : 55,963.33 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
जून : 49,028.63 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
जुलाई : 5,778.99 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी
अगस्त : 21 तारीख तक: 2,514.28 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव

विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर कारोबार करते हैं। उनकी लगातार बिकवाली बाजार की तरलता और प्रमुख शेयरों पर दबाव बना सकती है। इसके उलट, खरीदारी बढ़ने पर बैंकिंग, बड़ी कंपनियों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों को समर्थन मिल सकता है। अब तक विदेशी बिकवाली के दौरान घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंडों ने भारतीय बाजार को काफी हद तक संभाला। यदि विदेशी निवेशक भी दोबारा सक्रिय खरीदार बनते हैं तो बाजार को मांग के दो बड़े स्रोत मिल सकते हैं।इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के साथ कंपनियों के मूल्यांकन और पूंजी जुटाने की क्षमता को भी समर्थन मिल सकता है।

रुपये के लिए भी राहत का संकेत

विदेशी निवेश की वापसी का असर रुपये पर भी पड़ सकता है। भारतीय शेयरों में निवेश के लिए विदेशी निवेशकों को डॉलर या अन्य विदेशी मुद्राओं को रुपये में बदलना पड़ता है। इससे रुपये की मांग बढ़ती है और उस पर बना दबाव कम हो सकता है। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए भी बाजार से धन जुटाने का माहौल बेहतर हो सकता है।

इन क्षेत्रों पर रह सकती है विदेशी नजर

विदेशी निवेशकों की खरीदारी का रुख बना रहा तो बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के अलावा उपभोक्ता क्षेत्र, औद्योगिक कंपनियां, स्वास्थ्य सेवाएं और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र उनकी प्राथमिकता में रह सकते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट शिवम ओमर के अनुसार, बाजार की वास्तविक परीक्षा सितंबर में होगी। यदि अगस्त के अंत तक खरीदारी का रुख कायम रहता है और सितंबर में भी विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बने रहते हैं, तो इसे इस बात का मजबूत संकेत माना जा सकता है कि लंबे समय से जारी बिकवाली का दौर समाप्ति की ओर है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News