- कानपुर बैराज पर चेतावनी स्तर तक पहुंचा जलस्तर, 3.36 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज; मध्य यूपी में बारिश के आसार, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
कानपुर। बारिश का नया दौर और ऊपर से लगातार आ रहा पानी कानपुर में गंगा की रफ्तार और जलस्तर दोनों पर दबाव बढ़ा रहा है। सोमवार सुबह गंगा कानपुर बैराज पर चेतावनी स्तर तक पहुंच गईं। 24 अगस्त को सुबह 8 बजे दर्ज आंकड़ों के मुताबिक अपस्ट्रीम जलस्तर 114 मीटर रहा, जो चेतावनी स्तर के बराबर है। खतरे का निशान अब महज एक मीटर ऊपर है। ऐसे में मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना और ऊपरी बैराजों से पानी का प्रवाह प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
Flood Control Office, LGC Kanpur की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर बैराज पर 3,36,822 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। डाउनस्ट्रीम जलस्तर 113.850 मीटर है। यहां खतरे का निशान 115 मीटर है, जबकि खतरे के स्तर पर डिस्चार्ज 5,44,373 क्यूसेक माना गया है।
चेतावनी स्तर पर पहुंचीं गंगा, नजर अगले पानी पर
कानपुर बैराज पर गंगा का अपस्ट्रीम जलस्तर चेतावनी स्तर तक पहुंचना इस समय सबसे बड़ा संकेत है। नदी अभी खतरे के निशान से नीचे जरूर है, लेकिन आगे की स्थिति अब दो बातों पर निर्भर करेगी, बारिश कितनी होती है और ऊपरी क्षेत्रों से कितना पानी आता है। कानपुर बैराज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु तक पहुंचने के बाद निचले इलाकों और गंगा किनारे बसे क्षेत्रों पर नजर बढ़ना स्वाभाविक है। नदी का रुख फिलहाल प्रशासनिक निगरानी का विषय बन चुका है। शुक्लागंज में सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 112.520 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का निशान 114 मीटर है। यानी नदी चेतावनी स्तर से नीचे है, लेकिन अंतर अब बहुत ज्यादा नहीं बचा है।
हरिद्वार और नरोरा से जारी है पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज : 78,954 क्यूसेक
नरोरा बैराज : 1,22,848 क्यूसेक
कानपुर बैराज : 3,36,822 क्यूसेक
बारिश के साथ कई राज्यों में मौसम अलर्ट
24 अगस्त के मौसम पूर्वानुमान में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहने के संकेत हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में बारिश का असर अधिक रहने की संभावना है, जबकि मध्य उत्तर प्रदेश में भी बादल और बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। बारिश और तेज हवाओं के दौरान बिजली गिरने तथा स्थानीय स्तर पर मौसम के अचानक बिगड़ने का भी खतरा बना हुआ है।
कानपुर के लिए दोहरी चुनौती
कानपुर के सामने फिलहाल चुनौती सिर्फ स्थानीय बारिश नहीं है। ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी और संभावित बारिश मिलकर गंगा का मिजाज बदल सकते हैं। कानपुर बैराज पर गंगा पहले ही चेतावनी स्तर को छू चुकी हैं। खतरे के निशान तक पहुंचने से पहले जलस्तर की हर बढ़त महत्वपूर्ण होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले घंटों में बारिश का असर कितना पड़ता है और ऊपरी बैराजों से पानी का डिस्चार्ज किस दिशा में जाता है।

