- जरूरतमंद बच्चों के लिए एजुकेशन लैब शुरू, कक्षा एक से डिजिटल सीखने का अवसर, पिंडारी गांव में स्वास्थ्य शिविर भी लगाया
भारत 19
इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई ने गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर जरूरतमंद बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की पहल की है। विश्वविद्यालय में डिजिटल एजुकेशन लैब शुरू की गई है, जहां कक्षा एक से बच्चों को डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। पहल का मकसद आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर बच्चों को शुरुआती स्तर पर तकनीक से परिचित कराकर उनके सीखने के दायरे को बढ़ाना है।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा, “गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही अहिंसा का सबसे बड़ा मंत्र है।” उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा तथा लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के विचारों को जीवन और कार्यशैली में उतारना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि है। कुलपति ने कहा कि शिक्षा तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही तकनीक आधारित सीखने का अवसर मिलने से वे बदलती शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के सकारात्मक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मिल रही जन प्रतिक्रियाओं को टीम के लिए प्रोत्साहन बताया।
पिंडारी गांव में स्वास्थ्य शिविर
जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में पिंडारी गांव में स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया। ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच के साथ उन्हें स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। कुलपति ने कहा कि स्वच्छता बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने से कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य, दोनों मोर्चों पर पहल
UPUMS की ओर से आयोजित गतिविधियों में एक तरफ बच्चों को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने पर जोर रहा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आबादी तक स्वास्थ्य जांच और जागरूकता पहुंचाई गई। इस तरह जयंती कार्यक्रम को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया। चिकित्सा विश्वविद्यालय की यह पहल इस व्यापक बदलाव की ओर भी संकेत करती है, जिसमें स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका उपचार और चिकित्सा शिक्षा के साथ समुदाय से जुड़े सामाजिक सरोकारों तक विस्तार पा रही है।


