- हूतियों से रणनीतिक जलडमरूमध्य छीनने की तैयारी; एक लाख से ज्यादा यमनी लड़ाकों को उतारने की योजना, सऊदी हवाई हमलों से देगा समर्थन, अमेरिका की खुफिया मदद और पाकिस्तान-तुर्किये से सैन्य सहयोग की तैयारी
भारत 19/ यमन में हूती विद्रोहियों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच सऊदी अरब अब बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। Reuters के अनुसार रियाद का मुख्य लक्ष्य बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना है, जिसे हूतियों ने पिछले महीने यमन के लाल सागर तट पर बढ़त के दौरान अपने नियंत्रण में ले लिया था। संभावित अभियान में सऊदी समर्थित यमनी जमीनी बल आगे रहेंगे, जबकि सऊदी वायुसेना उन्हें हवाई समर्थन देगी। सऊदी अरब की मदद से यमन की अधिकारिक सरकार एक लाख से ज्यादा यमनी लड़ाकों को लामबंद किया जा रहा है। फिलहाल रियाद दो विकल्पों पर विचार कर रहा है, पहला बाब-अल-मंदेब के आसपास सीमित तटीय कार्रवाई या यमन के कई मोर्चों पर एक साथ व्यापक अभियान। हालांकि कार्रवाई कब शुरू होगी, ये तय नहीं है।
निशाने पर बाब-अल-मंदेब, क्यों अहम है यह जलडमरूमध्य
बाब-अल-मंदेब लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बेहद अहम समुद्री मार्ग है। लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए लंबे समय से इसका रणनीतिक महत्व है। स्ट्रेट आफ हार्मूज बंद होने से सामुद्रिक व्यापार में इस वक्त इसकी अहमियत बहुत बढ़ गई है। Reuters के मुताबिक सऊदी नेतृत्व का आकलन है कि हूतियों के बाब-अल-मंदेब पर नियंत्रण रहते उनके साथ नई शांति वार्ता में आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इसलिए प्रस्तावित सैन्य अभियान का उद्देश्य केवल क्षेत्रीय सैन्य बढ़त हासिल करना नहीं, बल्कि समुद्री आवाजाही को फिर सामान्य करना भी है।
एक लाख से ज्यादा यमनी लड़ाके, सऊदी देगा हवाई कवर
संभावित जमीनी कार्रवाई की जिम्मेदारी सऊदी समर्थित यमनी बलों की होगी। Reuters से बातचीत करने वाले अधिकारियों के अनुसार अभियान के पैमाने के हिसाब से एक लाख से अधिक यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है। सऊदी वायुसेना इन बलों को हवाई हमलों के जरिए समर्थन देगी। फिलहाल जिन विकल्पों पर विचार हो रहा है, उनमें एक सीमित कार्रवाई बाब-अल-मंदेब और आसपास के तटीय इलाकों पर केंद्रित होगी। दूसरे विकल्प में अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे कई मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई शामिल हो सकती है। अभियान के लिए कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है।
अमेरिका की खुफिया मदद, पाकिस्तान-तुर्किये भी अहम
सऊदी अभियान की तैयारियों में अमेरिका की भूमिका भी सामने आई है। Reuters के अनुसार अमेरिका सऊदी अभियानों के लिए खुफिया और लक्ष्य संबंधी जानकारी उपलब्ध करा रहा है। अमेरिकी सैनिकों के सीधे युद्ध में उतरने की उम्मीद नहीं है। वह मुख्यतः खुफिया उपलब्ध कराएगा। पाकिस्तान और तुर्किये से भी सऊदी अरब को सैन्य सहायता मिल रही है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब को वायु रक्षा प्रणालियां, हल्की तोपें, ड्रोन और ड्रोन रोधी उपकरण भेजे हैं। पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार भी सऊदी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ने यमन में लड़ाकू भूमिका के लिए अपने सैनिक भेजने का फैसला नहीं किया है। तुर्किये के ड्रोन देगा। फ्रांस ने भी सऊदी अरब के लाल सागर तट की सुरक्षा के लिए रक्षात्मक प्रणालियां और सैनिक भेजने की घोषणा की है।
2022 की शांति के बाद फिर क्यों बढ़ा संघर्ष
सऊदी अरब 2015 से यमन के गृहयुद्ध में हूतियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। 2022 में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम के बाद सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी। लेकिन इस साल क्षेत्रीय संघर्ष के विस्तार के साथ स्थिति फिर बिगड़ गई। हूतियों ने सऊदी जहाजों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर हमले किए। पिछले महीने हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर तेजी से बढ़त बनाते हुए उस पूरे तटीय क्षेत्र का नियंत्रण सऊदी समर्थित बलों से छीन लिया। इस दौरान ताइज में भी लड़ाई तेज हुई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती ठिकानों पर 20 हवाई हमले किए जाने की जानकारी दी है। ताइज पर नियंत्रण हूतियों को उत्तरी यमन, लाल सागर तट और अदन की दिशा में रणनीतिक बढ़त दे सकता है।
हूतियों से लड़ाई का मानवीय असर भी गहरा
सैन्य तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर यमन की आम आबादी पर पड़ रहा है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में 74 प्रतिशत परिवार पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पा रहे हैं। हालिया लड़ाई में हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हुई है। यमन अपनी करीब 90 प्रतिशत खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक अस्थिरता रहने से देश के भीतर खाद्य संकट और गहरा सकता है। WFP ने बताया है कि उसे विस्थापित लोगों और पहले से सहायता पा रहे लाखों लोगों के लिए राहत अभियान जारी रखने को अतिरिक्त धन की जरूरत है।
लाल सागर से आगे वैश्विक असर का खतरा
बाब-अल-मंदेब में लंबे समय तक सैन्य टकराव का असर यमन की सीमा से बाहर जा सकता है। यह मार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार की अहम कड़ी है और स्ट्रेट आफ हार्मूज के साथ मिलकर मध्य-पूर्व के दो प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट में शामिल है। दोनों मार्गों में व्यवधान से ईंधन और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यमन में संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने और विस्थापन बढ़ने से पहले ही मानवीय संकट गहरा रहा है। ऐसे में सऊदी अरब की प्रस्तावित कार्रवाई का असर सिर्फ हूतियों और यमन तक सीमित नहीं रहेगा। बाब-अल-मंदेब के पास सैन्य अभियान शुरू होने से लाल सागर की शिपिंग, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर इसका असर पड़ेगा।
फिलहाल सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके समर्थन वाले विभिन्न यमनी गुटों को एक प्रभावी जमीनी बल में कितना समन्वित किया जा सकता है। Reuters से बात करने वाले विशेषज्ञों ने भी अभियान की सफलता को स्थानीय यमनी बलों की क्षमता और संगठन से जोड़कर देखा है। इसलिए मौजूदा स्थिति को हूती विरोधी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी के रूप में देखना ज्यादा सटीक है, न कि सऊदी अरब द्वारा तत्काल व्यापक युद्ध शुरू किए जाने के रूप में।


